Sunday, 31 March 2013

महिला से छेडखानी के आरोपी को दो साल की कैद और 15000 रूपये जुर्माना


मंडी। घर में प्रवेश करके महिला से छेडखानी करने का अभियोग साबित होने पर अदालत ने एक आरोपी को दो साल के साधारण कारावास और 15000 रूपये जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपी के जुर्माना राशि निश्चित अवधि में जमा न करने पर उसे दो माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेन्द्र सिंह के न्यायलय ने बल्ह क्षेत्र के पीपली गांव निवासी नंद लाल उर्फ नंदू पुत्र वीणु राम के खिलाफ भादंसं की धारा 452 और 354 के तहत घर में घुस कर छेडखानी का अभियोग साबित होने पर क्रमश: दो और डेढ साल के साधारण कारावास और क्रमश: 10,000 और 5000 रूपये जुर्माने की सजा सुनाई। ये दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार 21 जून 2009 को पीडित महिला अपने घर में पति के साथ सोई हुई थी। गर्मी का मौसम होने के कारण उन्होने कमरे का दरवाजा खुला रखा हुआ था। इसी दौरान आरोपी ने उनके घर में प्रवेश किया और महिला से छेडखानी की। पीडिता के शोर मचाने पर आरोपी मौका से फरार हो गया। महिला ने अपने परिजनों के साथ बल्ह थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। पुलिस ने प्राथमिकी के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करके उसे हिरासत में लेने के बाद अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला न्यायवादी जे के लखनपाल ने चार गवाहों के बयान कलमबध करवा कर मामले को साबित किया। जबकि बचाव पक्ष की ओर से भी दो गवाहों ने अपने बयान दिये। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देकर सजा की अवधि पर दोनों पक्षों की सुनवाई की। जिसमें बचाव पक्ष की ओर से आरोपी का पहला अपराध होने के कारण नरम रूख अपनाने की प्रार्थना की गई। जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपी को कडी सजा की मांग की गई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह सही समय है जब महिलाओं के विरूध हो रहे अपराधों के साथ सखती से निपटा जाए। समाज के हितों को देखते हुए आरोपी के प्रति नरम रूख नहीं अपनाया जा सकता। ऐसे में अदालत ने आरोपी को उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया।

Saturday, 30 March 2013

दुराचारी अध्यापक को 10 साल कठोर कारावास और 1,10,000 रूपये जुर्माने की सजा


मंडी। आठवीं कक्षा की नाबालिग से दुराचार करने के आरोपी अध्यापक को अदालत ने 10 साल के कठोर कारावास और एक लाख 10 हजार रूपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया। आरोपी से प्राप्त होने वाली जुर्माना राशि में से आधी राशि पीडिता के पक्ष में बतौर हर्जाना अदा की जाएगी। जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेन्द्र सिंह के न्यायलय ने सदर तहसील के रती गांव निवासी राम सिंह पुत्र लंगेडा राम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 354 के तहत अभियोग साबित होने पर क्रमश: 10 साल और दो साल के कठोर कारावास और क्रमश: एक लाख व दस हजार रूपये के जुर्माना राशि की सजा सुनाई। आरोपी के जुर्माना राशि निश्चित समय में अदा न करने पर उसे क्रमश: 6 और 2 माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार एक दिसंबर 2010 को आरोपी ने पीडिता से कहा कि वह आधे दिन की छुटटी के लिए उसके पास आवेदन मांगा और उसे डिपो के पास आने के निर्देश दिये। इसके बाद आरोपी पीडिता को अपने साथ वाहन में बिठा कर कुछ दूरी तक ले गया और उसे सडक से नीचे की ओर ले जाकर उससे अकेली जगह में दुराचार किया। पीडिता ने बाद में इस घटना की सूचना अपने परिजनों को दी। जिस पर परिजनों सहित पीडिता ने बल्ह थाना में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला न्यायवादी जे के लखनपाल ने इस मामले में 9 गवाहों के बयान दर्ज करवा कर इसे साबित किया। सजा की अवधि पर हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष का कहना था कि यह आरोपी का पहला अपराध है जिसके चलते आरोपी के प्रति नरम रूख अपनाया जाए। जबकि जिला न्यायवादी जे के लखनपाल का कहना था कि आरोपी घटना के समय पीईटी के पद पर स्कूल में तैनात था जबकि पीडिता आठवीं कक्षा की छात्रा थी। आरोपी ने अपने पद का दुरूपयोग कर गुरू-शिष्य परंपरा को कलंकित किया है। जिसके चलते आरोपी को कडी सजा दी जाए। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने अपनी बेटी जिसकी आयु 18 वर्ष है से भी छोटी पीडिता से दुराचार करके शर्मनाक और अमानवीय कृत्य किया है। आरोपी ने उन सैंकडों अभिभावकों के विश्वास को तोडा है जो अपनी बेटियों को शिक्षक कहे जाने व्यक्ति की हिफाजत में स्कूल भेजते हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी का कृत्य उदार रूख अपनाए जाने योगय नहीं हैं। ऐसे में उसे उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया गया। आरोपी से प्राप्त होने वाली जुर्माना राशि में से आधी राशि पीडिता के पक्ष में बतौर हर्जाना अदा की जाएगी।

Monday, 25 March 2013

मैगा लोक अदालत में 278 मामलों का मौका पर निपटारा


मंडी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायलय में मैगा लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला विधिक प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के 278 मामलों का मौका पर ही निपटारा कर दिया गया। इन मामलों में याचिकाकर्ताओं के पक्ष में करीब 2,50,000 रूपये की हर्जाना राशि अदा करने के आदेश दिये गये। जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेन्द्र सिंह ने इस मैगा लोक अदालत की अध्यक्षता की। मैगा अदालत में छोटे अपराधों, चैक संबंधी शिकायतों, मोटर वाहन अधिनियम और अन्य मामलों का मौका पर ही निपटारा कर दिया गया।

अर्बन बैंक के अध्यक्ष सहित 6 निदेशकों को चार-चार साल के कठोर कारावास दो-दो लाख जुर्माने की सजा


मंडी। बहुचर्चित मंडी अर्बन कॉपरेटिव बैंक घोटाले के मामले में सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायलय ने दोषी करार दिये गए बैंक के अध्यक्ष सहित 6 निदेशकों को चार-चार साल के कठोर कारावास और दो-दो लाख रूपये जुर्माने की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेन्द्र सिंह की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों पर आपराधिक षडयंत्र के तहत विश्वासघात का आरोप साबित होने पर यह सजा सुनाई। आरोपियों पर 13 मार्च को अदालत ने दोषी करार दिया था। जिसके बाद सजा की अवधि के लिये पहले 19 मार्च, फिर 23 मार्च और बाद में 25 मार्च को सुनवाई निश्चित की थी। सोमवार को खचाखच भरी अदालत परिसर में इस अहम मामले का फैसला सुनाया गया। अदालत ने बैंक के तात्कालीन अध्यक्ष महेन्द्र पाल सहगल, निदेशक अजीत कपूर, मंजीत सिंह धमीजा, महेश बहल, नितिन कपूर और अनिल कपूर को उक्त सजा का फैसला सुनाया। इससे पूर्व अभियोजन पक्ष की ओर मामले की पैरवी करने वाले जिला न्यायवादी जे के लखनपाल ने सजा की अवधि के लिए हुई सुनवाई के दौरान तर्क देते हुए अदालत से आरोपियों को कडी सजा देने की मांग की,जबकि बचाव पक्ष की ओर से आरोपियों के प्रति अदालत से नर्म रूख अपनाने की गुहार लगाई। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी करने वाले जिला नयायवादी जेके लखनपाल ने बताया कि बैंक के प्रशासक मस्त राम ने एक अप्रैल 2005 को सदर थाना मंडी में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी कि मार्च 2005 में कार्यभार संभालने के बाद रिकॉर्ड को खंगालने पर उन्हें पता चला कि बैंक के मैनेजर और पदाधिकारियों ने विश्वासघात करके बैंक को भारी नुक्सान पहुंचाया है, क्योंकि बैंक मैनेजर ऋण देते समय बंधक पत्र(मोर्टगेज) प्राप्त करने में कोताही बरती है और बैंक का नॉन परफार्मिंग (एनपीए) को अनाधिकृत रूप से सैटल किया गया है, जिसमें एकमुश्त अदायगी(ओटीएस) स्कीम का उल्लंघन किया गया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज कर अदालत में 18 आरोपियों के खिलाफ अभियोग चलाया। सुनवाई के दौरान बैंक के मैनेजर परमिंद्र वैद्य और हेमंत कुमार टंडन की मौत हो गई जबकि 16 आरोपियों के खिलाफ अभियोग साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने अपनी 104 पृष्ठों के फैसले में इस मामले में संलिप्त बैंक के अध्यक्ष सहित निदेशक मंडल के छह सदस्यों को भारतीय दंड संहिता की धारा 409 व 120 बी के तहत षडय़ंत्रपूर्वक विश्वासघात का दोषी करार दिया जबकि 10 अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के अपराध से आम जनता और बैंक के निवेशकों और खाताधारकों का विश्वास टूटा है। इस अपराध से कॉपरेटिव बैंकिंग की विश्ववसनियता पर भी प्रश्रचिन्ह लगा है, क्योंकि इस बैंक को आम जनता की भगाीदारी से स्थापित किया गया था। यह अपराध एकदम नहीं किया गया था बल्कि सोचे समझे तरीके से अंजाम दिया गया। अदालत ने कहा कि आरोपियों ने ओटीएस स्कीम का उल्लंघन करके जल्दबाजी में ऋण वसूली के कुछ मामलों का खत्म किया। अदालत ने कहा कि आरोपी यह बताने में असफल रहे कि अनिल सहगल, एनएन सहगल, दया सहगल और किशन चंद वैद्य के मामले ओटीएस स्कीम के तहत कैसे खत्म किए गए जबकि इस मामले की सैटलमैंट करने से बैंक को 741850 रूपए का नुक्सान उठाना पड़ा। ऐसे में अदालत ने आरोपियों को उक्त करावास और जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि दोषियों से वसूल की गई जुर्माना राशि अर्बन बैंक को इस निर्देश सहित दी जाएगी कि यह राशि जमाकर्ताओं को वितरित की जाएगी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जुर्माना राशि अदा न करने की सूरत में दोषियों को छह-छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।

Saturday, 23 March 2013

इप्टा ने मनाया जिला न्यायलय में शहीदी दिवस


मंडी। शहीदी दिवस के अवसर पर इंडियन पिपलस थियेटर एसोसिएशन की ओर से जिला न्यायलय परिसर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेन्द्र सिंह ने की। इस अवसर पर संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव की शहादत की बदौलत देश को आजादी मिली। आजाद होने के बाद देश ने अपना संविधान बनाया और अपने लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था का चयन किया। लेकिन व्यवस्थागत खामियों के कारण देश के समक्ष अनेकों चुनौतियां सामने हैं। व्यवस्था में रह कर ही इसमें सुधार लाकर इन चुनौतियों का सामना किया जाना चाहिए। उन्होने कहा कि अगर देश के समक्ष चुनौतियों से नहीं निपटा गया तो हमारे शहीदों की शहादत व्यर्थ चली जाएगी। इप्टा के संयोजक लवण ठाकुर ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए शहीदों के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के बारे में बताया। उन्होने कहा कि देश के निर्माण के लिये भावी पीढी को शहीदों की शहादत से प्रेरणा लेनी चाहिए। इससे पूर्व दो मिनट का मौन रख कर शहीदों को श्रद्धांजली दी गई। कार्यक्रम में इप्टा के कलाकारों भुपेन्द्र ठाकुर, प्रवेश, जय कुमार, दीपक मट्टु, शेरू, नवीन राठौर और समीर कश्यप ने देशभक्तिके गीतों से भाव विभोर कर दिया। जिला बार एसोसिएशन केे महासचिव लोकेन्द्र कुटलैहडिया ने इंडियन पीपलस थियेटर एसोसिएशन का न्यायलय परिसर के बार रूम में कार्यक्रम करने पर धन्यावाद किया। कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश डा. बलदेव सिंह, फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी पदम सिंह ठाकुर, मुखय न्यायिक दंडाधिकारी मदन कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट नंबर चार गीतिका कपिला, पुलिस अधिकारी, बार एसोसिएशन के पदाधिकारी व सदस्य तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद थे।

Sunday, 17 March 2013

यह चेहरा


यह चेहरा मेरे एक सहपाठी का है..
अधिक सुंदर नहीं, असुंदर भी नहीं,
साधारण और असाधारण की सीमाओं में स्थापित है यह चेहरा।

 यह चेहरा एक आकर्षण है
सबके लिए नहीं पर कुछों के लिए।
 आकर्षण के कारण भी अनेक हैं उन कुछों के लिए
 अपने-अपने कारणों से आकर्षित
 सब के सब
 उस चेहरे में व्यस्त हैं।

 यह चेहरा नापता है
धरती के एक खास टुकडे को
 अपने विशिष्ट कदमों से
 अपने रोजनामचे में।
 इस शांत, सौम्य चेहरे में
 छिपी बैठी रहती है
 भारी व्यस्तता, द्वंद और
 विचारों की उठापटक।

 इस चेहरे की आंखों की पुतलियां
 खोज में होती है
 नयी जानकारियों और नयी किताबों की।
न जाने किन प्रश्नों के उतर की
 तलाश में बढ जाना चाहता है यह चेहरा।

 यह अक्सर शिकार होता है
 सहपाठियों की भर्तसनाओं का
 साथियों के छिछलेपन का
 कक्षा के छुटभैय्या नेता की
 राजनिती का।

 यह चेहरा
 प्रिय दोस्त है उसके
 पहचाने पर अनजाने दोस्त का
 जो द्रवित और अकुलित होता है हमेशा
 जब भी चेष्टा की जाती है
 इस चेहरे को रूआंसा करने की
 या फिर उसकी मासूमियत छीनने की।

 समीर कश्यप बी.ए. तृतीय वर्ष,  वर्ष 1994, मंडी, हि.प्र.

Saturday, 16 March 2013

काष्ठ माडल की कला को नया आयाम देने की कोशीश


मंडी। काष्ठ माडल की कला भले ही अभी लोकप्रिय नहीं हुई है लेकिन इस क्षेत्र में कलाकर्मियों ने कई आयाम स्थापित किये हैं। मंडी के जवाहर नगर निवासी परमानंद भी इस कला में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। शौकिया शुरूआत ने उन्हे कब इस कला का हुनरमंद बना दिया इसका भान उन्हे तब हुआ जब कला के पारखियों ने उनकी कला का मोल समझा। परमानंद को प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 2007 में राज्य पुरूस्कार से भी नवाजा जा चुका है। दिन के समय फर्नीचर इंडस्ट्री की दुकान में काम करने के बाद शाम को परमानंद का समय अपने माडलों को निखारने में बीतता है। परमानंद अपने शौक के चलते महत्वपूर्ण स्थलों के अभी तक करीब 25 काष्ठ माडल बना चुके हैं। जिनमें से पराशर झील का पैगोडा शैली में बना मंदिर, हैदराबाद की चार मीनार, मंडी का घंटाघर, विक्टोरिया ब्रिज, विजय सीनीयर सैकेंडरी स्कूल का ओ ब्लाक, शिमला का चर्च आदि इनके कुछ प्रसिद्ध माडल हैं। हालांकि वह खुद इनमें से कई जगहों पर गये भी नहीं हैं लेकिन महत्वपूर्ण स्थलों को मात्र इनके चित्रों से देख कर ही जीवंत कर दिया है। इन माडलों में छोटी से छोटी बारिकी का भी ध्यान रखा जाता है और हुबहु आकृति तैयार कर दी जाती है। हाथों की इस कला में भारी मेहनत भी लगती है। परमानंद हमेशा नये माडलों की तलाश में लगे रहते हैं। इन दिनों परमानंद कुल्लू जिला की बंजार तहसील की चैहणी कोठी के माडल पर कार्य कर रहे हैं। जिसके लिए वह हाल ही में अपने एक सहयोगी सूरज के साथ विशेष रूप से चैहणी कोठी भी गए थे। अपने काम के तरीके पर प्रकाश डालते हुए उन्होने बताया कि वह अपने माडल में देवदार, चीड, रई की लकडी व पलाई का प्रयोग करते हैं जिन्हे वह फेविकोल से जोड कर आकार देते हैं। इसके बाद इसे पालिश और पेंट करने के बाद अंतिम रूप दिया जाता है। परमानंद ने बताया कि उन्हे अपनी मेहनत की कदरदानों से उचित कीमत भी मिल जाती है। लेकिन अभी तक वह सार्वजनिक रूप से अपनी कला की प्रदर्शनी नहीं लगा पाए हैं। हालांकि इस बार वह शिवरात्री मेले के दौरान एक दिन के लिए अपनी कला की प्रदर्शनी के तौर पर अपने माडलों को प्रदर्शित करेंगे। उन्होने कहा कि अगर उनके इस कार्य को उचित तवज्जो दी जाए तो यह नयी पीढी के लिए आमदनी का एक अच्छा साधन बन सकता है।

मंडी में बनाया जाए आधुनिक पुस्तकालयः शहीद भगत सिंह विचार मंच

मंडी। प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मंडी में आधुनिक और बेहतरीन पुस्तकालय के निर्माण की मांग की गई है। इस संदर्भ में शहर की संस्...