मंडी। घर में प्रवेश करके महिला से छेडखानी करने का अभियोग साबित होने पर अदालत ने एक आरोपी को दो साल के साधारण कारावास और 15000 रूपये जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपी के जुर्माना राशि निश्चित अवधि में जमा न करने पर उसे दो माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेन्द्र सिंह के न्यायलय ने बल्ह क्षेत्र के पीपली गांव निवासी नंद लाल उर्फ नंदू पुत्र वीणु राम के खिलाफ भादंसं की धारा 452 और 354 के तहत घर में घुस कर छेडखानी का अभियोग साबित होने पर क्रमश: दो और डेढ साल के साधारण कारावास और क्रमश: 10,000 और 5000 रूपये जुर्माने की सजा सुनाई। ये दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार 21 जून 2009 को पीडित महिला अपने घर में पति के साथ सोई हुई थी। गर्मी का मौसम होने के कारण उन्होने कमरे का दरवाजा खुला रखा हुआ था। इसी दौरान आरोपी ने उनके घर में प्रवेश किया और महिला से छेडखानी की। पीडिता के शोर मचाने पर आरोपी मौका से फरार हो गया। महिला ने अपने परिजनों के साथ बल्ह थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। पुलिस ने प्राथमिकी के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करके उसे हिरासत में लेने के बाद अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला न्यायवादी जे के लखनपाल ने चार गवाहों के बयान कलमबध करवा कर मामले को साबित किया। जबकि बचाव पक्ष की ओर से भी दो गवाहों ने अपने बयान दिये। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देकर सजा की अवधि पर दोनों पक्षों की सुनवाई की। जिसमें बचाव पक्ष की ओर से आरोपी का पहला अपराध होने के कारण नरम रूख अपनाने की प्रार्थना की गई। जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपी को कडी सजा की मांग की गई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह सही समय है जब महिलाओं के विरूध हो रहे अपराधों के साथ सखती से निपटा जाए। समाज के हितों को देखते हुए आरोपी के प्रति नरम रूख नहीं अपनाया जा सकता। ऐसे में अदालत ने आरोपी को उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया। Sunday, 31 March 2013
महिला से छेडखानी के आरोपी को दो साल की कैद और 15000 रूपये जुर्माना
मंडी। घर में प्रवेश करके महिला से छेडखानी करने का अभियोग साबित होने पर अदालत ने एक आरोपी को दो साल के साधारण कारावास और 15000 रूपये जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपी के जुर्माना राशि निश्चित अवधि में जमा न करने पर उसे दो माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेन्द्र सिंह के न्यायलय ने बल्ह क्षेत्र के पीपली गांव निवासी नंद लाल उर्फ नंदू पुत्र वीणु राम के खिलाफ भादंसं की धारा 452 और 354 के तहत घर में घुस कर छेडखानी का अभियोग साबित होने पर क्रमश: दो और डेढ साल के साधारण कारावास और क्रमश: 10,000 और 5000 रूपये जुर्माने की सजा सुनाई। ये दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार 21 जून 2009 को पीडित महिला अपने घर में पति के साथ सोई हुई थी। गर्मी का मौसम होने के कारण उन्होने कमरे का दरवाजा खुला रखा हुआ था। इसी दौरान आरोपी ने उनके घर में प्रवेश किया और महिला से छेडखानी की। पीडिता के शोर मचाने पर आरोपी मौका से फरार हो गया। महिला ने अपने परिजनों के साथ बल्ह थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। पुलिस ने प्राथमिकी के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करके उसे हिरासत में लेने के बाद अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला न्यायवादी जे के लखनपाल ने चार गवाहों के बयान कलमबध करवा कर मामले को साबित किया। जबकि बचाव पक्ष की ओर से भी दो गवाहों ने अपने बयान दिये। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देकर सजा की अवधि पर दोनों पक्षों की सुनवाई की। जिसमें बचाव पक्ष की ओर से आरोपी का पहला अपराध होने के कारण नरम रूख अपनाने की प्रार्थना की गई। जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपी को कडी सजा की मांग की गई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह सही समय है जब महिलाओं के विरूध हो रहे अपराधों के साथ सखती से निपटा जाए। समाज के हितों को देखते हुए आरोपी के प्रति नरम रूख नहीं अपनाया जा सकता। ऐसे में अदालत ने आरोपी को उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया। Saturday, 30 March 2013
दुराचारी अध्यापक को 10 साल कठोर कारावास और 1,10,000 रूपये जुर्माने की सजा
मंडी। आठवीं कक्षा की नाबालिग से दुराचार करने के आरोपी अध्यापक को अदालत ने 10 साल के कठोर कारावास और एक लाख 10 हजार रूपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया। आरोपी से प्राप्त होने वाली जुर्माना राशि में से आधी राशि पीडिता के पक्ष में बतौर हर्जाना अदा की जाएगी। जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेन्द्र सिंह के न्यायलय ने सदर तहसील के रती गांव निवासी राम सिंह पुत्र लंगेडा राम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 354 के तहत अभियोग साबित होने पर क्रमश: 10 साल और दो साल के कठोर कारावास और क्रमश: एक लाख व दस हजार रूपये के जुर्माना राशि की सजा सुनाई। आरोपी के जुर्माना राशि निश्चित समय में अदा न करने पर उसे क्रमश: 6 और 2 माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार एक दिसंबर 2010 को आरोपी ने पीडिता से कहा कि वह आधे दिन की छुटटी के लिए उसके पास आवेदन मांगा और उसे डिपो के पास आने के निर्देश दिये। इसके बाद आरोपी पीडिता को अपने साथ वाहन में बिठा कर कुछ दूरी तक ले गया और उसे सडक से नीचे की ओर ले जाकर उससे अकेली जगह में दुराचार किया। पीडिता ने बाद में इस घटना की सूचना अपने परिजनों को दी। जिस पर परिजनों सहित पीडिता ने बल्ह थाना में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला न्यायवादी जे के लखनपाल ने इस मामले में 9 गवाहों के बयान दर्ज करवा कर इसे साबित किया। सजा की अवधि पर हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष का कहना था कि यह आरोपी का पहला अपराध है जिसके चलते आरोपी के प्रति नरम रूख अपनाया जाए। जबकि जिला न्यायवादी जे के लखनपाल का कहना था कि आरोपी घटना के समय पीईटी के पद पर स्कूल में तैनात था जबकि पीडिता आठवीं कक्षा की छात्रा थी। आरोपी ने अपने पद का दुरूपयोग कर गुरू-शिष्य परंपरा को कलंकित किया है। जिसके चलते आरोपी को कडी सजा दी जाए। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने अपनी बेटी जिसकी आयु 18 वर्ष है से भी छोटी पीडिता से दुराचार करके शर्मनाक और अमानवीय कृत्य किया है। आरोपी ने उन सैंकडों अभिभावकों के विश्वास को तोडा है जो अपनी बेटियों को शिक्षक कहे जाने व्यक्ति की हिफाजत में स्कूल भेजते हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी का कृत्य उदार रूख अपनाए जाने योगय नहीं हैं। ऐसे में उसे उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया गया। आरोपी से प्राप्त होने वाली जुर्माना राशि में से आधी राशि पीडिता के पक्ष में बतौर हर्जाना अदा की जाएगी। Monday, 25 March 2013
मैगा लोक अदालत में 278 मामलों का मौका पर निपटारा
मंडी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायलय में मैगा लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला विधिक प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के 278 मामलों का मौका पर ही निपटारा कर दिया गया। इन मामलों में याचिकाकर्ताओं के पक्ष में करीब 2,50,000 रूपये की हर्जाना राशि अदा करने के आदेश दिये गये। जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेन्द्र सिंह ने इस मैगा लोक अदालत की अध्यक्षता की। मैगा अदालत में छोटे अपराधों, चैक संबंधी शिकायतों, मोटर वाहन अधिनियम और अन्य मामलों का मौका पर ही निपटारा कर दिया गया। अर्बन बैंक के अध्यक्ष सहित 6 निदेशकों को चार-चार साल के कठोर कारावास दो-दो लाख जुर्माने की सजा
मंडी। बहुचर्चित मंडी अर्बन कॉपरेटिव बैंक घोटाले के मामले में सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायलय ने दोषी करार दिये गए बैंक के अध्यक्ष सहित 6 निदेशकों को चार-चार साल के कठोर कारावास और दो-दो लाख रूपये जुर्माने की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायधीश वीरेन्द्र सिंह की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों पर आपराधिक षडयंत्र के तहत विश्वासघात का आरोप साबित होने पर यह सजा सुनाई। आरोपियों पर 13 मार्च को अदालत ने दोषी करार दिया था। जिसके बाद सजा की अवधि के लिये पहले 19 मार्च, फिर 23 मार्च और बाद में 25 मार्च को सुनवाई निश्चित की थी। सोमवार को खचाखच भरी अदालत परिसर में इस अहम मामले का फैसला सुनाया गया। अदालत ने बैंक के तात्कालीन अध्यक्ष महेन्द्र पाल सहगल, निदेशक अजीत कपूर, मंजीत सिंह धमीजा, महेश बहल, नितिन कपूर और अनिल कपूर को उक्त सजा का फैसला सुनाया। इससे पूर्व अभियोजन पक्ष की ओर मामले की पैरवी करने वाले जिला न्यायवादी जे के लखनपाल ने सजा की अवधि के लिए हुई सुनवाई के दौरान तर्क देते हुए अदालत से आरोपियों को कडी सजा देने की मांग की,जबकि बचाव पक्ष की ओर से आरोपियों के प्रति अदालत से नर्म रूख अपनाने की गुहार लगाई।
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी करने वाले जिला नयायवादी जेके लखनपाल ने बताया कि बैंक के प्रशासक मस्त राम ने एक अप्रैल 2005 को सदर थाना मंडी में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी कि मार्च 2005 में कार्यभार संभालने के बाद रिकॉर्ड को खंगालने पर उन्हें पता चला कि बैंक के मैनेजर और पदाधिकारियों ने विश्वासघात करके बैंक को भारी नुक्सान पहुंचाया है, क्योंकि बैंक मैनेजर ऋण देते समय बंधक पत्र(मोर्टगेज) प्राप्त करने में कोताही बरती है और बैंक का नॉन परफार्मिंग (एनपीए) को अनाधिकृत रूप से सैटल किया गया है, जिसमें एकमुश्त अदायगी(ओटीएस) स्कीम का उल्लंघन किया गया है।
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज कर अदालत में 18 आरोपियों के खिलाफ अभियोग चलाया। सुनवाई के दौरान बैंक के मैनेजर परमिंद्र वैद्य और हेमंत कुमार टंडन की मौत हो गई जबकि 16 आरोपियों के खिलाफ अभियोग साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने अपनी 104 पृष्ठों के फैसले में इस मामले में संलिप्त बैंक के अध्यक्ष सहित निदेशक मंडल के छह सदस्यों को भारतीय दंड संहिता की धारा 409 व 120 बी के तहत षडय़ंत्रपूर्वक विश्वासघात का दोषी करार दिया जबकि 10 अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के अपराध से आम जनता और बैंक के निवेशकों और खाताधारकों का विश्वास टूटा है। इस अपराध से कॉपरेटिव बैंकिंग की विश्ववसनियता पर भी प्रश्रचिन्ह लगा है, क्योंकि इस बैंक को आम जनता की भगाीदारी से स्थापित किया गया था। यह अपराध एकदम नहीं किया गया था बल्कि सोचे समझे तरीके से अंजाम दिया गया। अदालत ने कहा कि आरोपियों ने ओटीएस स्कीम का उल्लंघन करके जल्दबाजी में ऋण वसूली के कुछ मामलों का खत्म किया। अदालत ने कहा कि आरोपी यह बताने में असफल रहे कि अनिल सहगल, एनएन सहगल, दया सहगल और किशन चंद वैद्य के मामले ओटीएस स्कीम के तहत कैसे खत्म किए गए जबकि इस मामले की सैटलमैंट करने से बैंक को 741850 रूपए का नुक्सान उठाना पड़ा।
ऐसे में अदालत ने आरोपियों को उक्त करावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि दोषियों से वसूल की गई जुर्माना राशि अर्बन बैंक को इस निर्देश सहित दी जाएगी कि यह राशि जमाकर्ताओं को वितरित की जाएगी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जुर्माना राशि अदा न करने की सूरत में दोषियों को छह-छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
Saturday, 23 March 2013
इप्टा ने मनाया जिला न्यायलय में शहीदी दिवस
Sunday, 17 March 2013
यह चेहरा
यह चेहरा
मेरे एक सहपाठी का है..अधिक सुंदर नहीं, असुंदर भी नहीं,
साधारण और असाधारण की सीमाओं में स्थापित है यह चेहरा।
यह चेहरा एक आकर्षण है
सबके लिए नहीं पर कुछों के लिए।
आकर्षण के कारण भी अनेक हैं उन कुछों के लिए
अपने-अपने कारणों से आकर्षित
सब के सब
उस चेहरे में व्यस्त हैं।
यह चेहरा नापता है
धरती के एक खास टुकडे को
अपने विशिष्ट कदमों से
अपने रोजनामचे में।
इस शांत, सौम्य चेहरे में
छिपी बैठी रहती है
भारी व्यस्तता, द्वंद और
विचारों की उठापटक।
इस चेहरे की आंखों की पुतलियां
खोज में होती है
नयी जानकारियों और नयी किताबों की।
न जाने किन प्रश्नों के उतर की
तलाश में बढ जाना चाहता है यह चेहरा।
यह अक्सर शिकार होता है
सहपाठियों की भर्तसनाओं का
साथियों के छिछलेपन का
कक्षा के छुटभैय्या नेता की
राजनिती का।
यह चेहरा
प्रिय दोस्त है उसके
पहचाने पर अनजाने दोस्त का
जो द्रवित और अकुलित होता है हमेशा
जब भी चेष्टा की जाती है
इस चेहरे को रूआंसा करने की
या फिर उसकी मासूमियत छीनने की।
समीर कश्यप बी.ए. तृतीय वर्ष, वर्ष 1994, मंडी, हि.प्र.
Saturday, 16 March 2013
काष्ठ माडल की कला को नया आयाम देने की कोशीश
Subscribe to:
Posts (Atom)
मंडी में बनाया जाए आधुनिक पुस्तकालयः शहीद भगत सिंह विचार मंच
मंडी। प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मंडी में आधुनिक और बेहतरीन पुस्तकालय के निर्माण की मांग की गई है। इस संदर्भ में शहर की संस्...
-
राहुल सांकृत्यायन की श्रेष्ठ कृति दर्शन-दिग्दर्शन का अध्ययन पूरा हुआ। दर्शन जैसे विषय पर मेरे जीवन में पढ़ी गई शायद यह पहली पुस्तक है। प...
-
मंडी। करीब पाँच सौ साल पहले स्थापित हुए हिमाचल प्रदेश के मण्डी नगर के बिखरे पड़े दुर्लभ चित्रों को एक एलबम के रूप में समेटने का प्रय...
-
मंडी। शनिवार को मंडी से कुल्लू जा रही एक निजी बस बिंद्रावणी के पास अनियंत्रित होकर ब्यास नदी में गिर गई। इस हादसे में 16 लोगों की मौत ह...