मंडी। जिला के होनहार अर्जुन सिंह ठाकुर ने महज चौबिस साल की उम्र में सेना में लेफ्टीनेंट बनकर प्रदेश का नाम देश भर में रोशन किया है। चेन्नई में आफीसर ट्रेनिंग के बाद उन्हे लेफ्टीनेंट के तौर पर कमीशंड किया गया है। उनके चयन से क्षेत्र में खुशी की लहर दौड गई है। जिला की सरकाघाट तहसील के लमरी नलयाणा (टिहरा) के अर्जुन सिंह ठाकुर को चेन्नई के ओटीए में आफिसर प्रशिक्षण के बाद लेफ्टीनेंट के रूप में कमीशंड किया गया है। अमर उजाला से बात करते हुए अर्जुन ने बताया कि उन्होने बचपन से ही सेना में सेवा करके देश की रक्षा करने का सपना संजो रखा था। सैन्य पृष्ठभूमि से संबंध रखने के कारण सेना की सेवा में चयनित होने की प्रेरणा उन्हे अपने परिजनों से ही मिली। अर्जुन अपनी इस सफलता का श्रेय सेना से कर्नल पद से सेवानिवृत अपने पिता कर्नल आर एस कौंडल को देते हैं। प्रशिक्षण के बाद उन्हे चौथी महार रेजिमेंट में बतौर कैप्टन तैनात किया गया है। अर्जुन के पिता कर्नल आर एस कौंडल भी महार रेजिमेंट में ही कार्यरत थे। संयोगवश अर्जुन को भी महार रेजिमेंट में तैनाती मिली है। सेवानिवृति के बाद उनके पिता एक प्राईवेट फर्म में बतौर जनरल मैनेजर तैनात हैं। जबकि उनकी माता इन दिनों राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पांवटा साहिब में लेक्चरर के पद पर कार्यरत हैं। 17 अगस्त 1987 को सरकाघाट में जन्मे अर्जुन की माध्यमिक कक्षा तक की पढाई सेंट ल्युक, सोलन और एपीएस डगशाई में हुई। उन्होने दसवीं कक्षा एपीएस धौलाकुआं, दिल्ली और वरिष्ठ माध्यमिक की पढाई गुरू नानक अकादमी, पांवटा साहिब में पूरी की। दिल्ली विश्वविदयालय से सनातक की पढाई करने के बाद अर्जुन सिंह का 2010 में सेना में चयन हुआ था। इधर, अर्जुन के चयन से क्षेत्र में खुशी की लहर है। अर्जुन के रिश्तेदार जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष राजीव भारद्वाज ने इस सफलता को अर्जुन की कडी मेहनत का नतीजा बताया है।
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