Wednesday, 6 July 2016

चरस तस्करी में दोषी को दस साल की कैद



मंडी। चरस तस्करी का अभियोग साबित होने पर अदालत ने एक आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास और एक लाख रूपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी के जुर्माना राशि को समय पर अदा न करने की सूरत में दो साल के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश (दो) कृष्ण कुमार की विशेष अदालत ने सरकाघाट तहसील के मतेहडी (नवाही) गांव निवासी रवि कुमार पुत्र दीना नाथ के खिलाफ मादक एवं नशीले पदार्थ अधिनियम की धारा 20 के तहत अभियोग साबित होने पर उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार सदर थाना पुलिस के पीएसआई कुलवंत सिंह की अगुवाई में पुलिस दल ने 9 दिसंबर 2014 को चंडीगढ मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग-21 पर सुक्की बाईं के पास नाका लगाया हुआ था। इसी दौरान मनाली की ओर से आ रही एक अल्टो कार को तलाशी के लिए रोका गया तो चालक के बायीं ओर की सीट पर रखे गए एक बैग से 4 किलो 400 ग्राम चरस बरामद हुई थी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए उप जिला न्यायवादी अजय ठाकुर ने 12 गवाहों के बयान कलमबंद करवा कर आरोपी पर अभियोग साबित किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ चरस तस्करी का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी से बरामदशुदा चरस की मात्रा व्यवसायिक होने के कारण उसे उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
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छोटे मकानों को रेगुलर करने की फीस कम करे सरकार



मंडी। भवन नियमितिकरण संघर्ष समिति मंडी ने प्रदेश सरकार के अध्यादेश में छोटे मकानों को नियमित करने की दरों में कमी लाने की मांग की है। समिति के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को इस बारे में नगर नियोजक को अपने सुझाव प्रस्तुत किये हैं। समिति के संयोजक उत्तम चंद सैनी, हितेन्द्र शर्मा, हरमीत सिंह बिट्टू, समीर कश्यप और किसान बचाओ मोर्चा के संयोजक देशराज शर्मा ने बताया कि सोमवार को नगर नियोजक दिनेश लता गुलेरिया और सहायक नगर नियोजक रीता महेन्द्रु को समिति की ओर से सुझाव दिये गए हैं कि नियमितिकरण की दरों को कम किया जाए, 30 प्रतिशत ओपन स्पेस की शर्त को भीड भरे शहरी क्षेत्रों में लागू नहीं किया जाए और आवेदन करने की समय सीमा 45 दिनों से बढा कर कम से कम 6 महीना की जाए। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि सरकार की ओर से जारी नियमितिकरण की पॉलिसी अभी भी आम जनता की पहुंच से दूर है। समिति का मानना है कि छोटे घरों के मालिक व छोटे व्यवसायिक परिसरों वाले लोग अभी भी इस एकमुश्त नियमितिकरण पालिसी का फायदा नहीं उठा पाएंगे। उन्होने बताया कि मंडी व अन्य शहरों के कोर टाउन एरिया में बने 160 वर्ग मीटर तक के रकबे वाले छोटे भवनों के सेटबैक में 30 प्रतिशत ओपन स्पेस की शर्त को पूरा नहीं कर सकते। क्योंकि इस शहरों में घरों के साथ सटे हुए घर हैं जिसके चलते 30 प्रतिशत ओपन स्पेस रखने की शर्त को यहां पर लागू करना संभव नहीं है। ऐसे में सरकार को अध्यादेश से इस शर्त को हटा कर शत प्रतिशत डेविएशन को अनुमति देनी चाहिए। अध्यादेश में नियमितिकरण की दरें अभी भी बहुत ज्यादा हैं और छोटे घरों व व्यवसायिक इकाइयों वाले लोगों की क्षमता से बहुत दूर हैं। जिससे वह इस पालिसी का फायदा उठाने से वंचित रह जाएंगे। समिति के सदस्यों ने बताया कि मौजूदा पालिसी के मुताबिक अगर किसी का मकान 160 वर्ग मीटर (चार बिस्वा) में बना है तो इसके ग्राउंड फलोर के सैटबैक की 70 प्रतिशत डेविएशन के लिए करीब एक लाख नौ हजार रूपये की फीस अदा करनी होगी। इसके अलावा 54 हजार रूपये प्रति मंजिल के हिसाब से अन्य फलोरों की फीस निर्धारित की गई है। इस तरह से नगर परिषद क्षेत्र में इस रकबे के लिए कुल फीस करीब 2.18 लाख रूपये के करीब तय की गई है जो आम नागरिक की पहुंच से बहुत दूर है। उसी तरह नप क्षेत्र में 100 वर्ग मीटर तक की नियमितिकरण फीस 1.5 लाख निर्धारित की है जबकि तीन मंजिलों तक यह 4.5 लाख रूपये बनती है। आम नागरिकों के लिए इतनी अधिक फीस जमा करवाना उनकी पहुंच से दूर है। समिति ने मांग की है कि 160 वर्ग मीटर तक छोटे भवनों और 80 वर्ग मीटर तक की व्यवसायिक इकाईयों की नियमितिकरण की फीस मौजूदा दर से 60 प्रतिशत कम की जाए। व्यवसायिक, होटल, पर्यटन, उद्योग के प्रयोग के लिए फीस सौ फीसदी बढाई गई है। लेकिन इस बढौतरी को दो बिस्वा तक की व्यवसायिक ईकाइयों पर लागू नहीं किया जाए और उन्हे इससे पूरी छूट दी जाए। समिति ने बीपीएल व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की फीस 50 फीसदी कम करने का स्वागत किया है। समिति का मानना है कि एक अन्य श्रेणी इजाद की जानी चाहिए जिसमें चार बिस्वा के भवनों व दो बिस्वा तक के व्यवसायिक इकाइयों को शामिल करके उनकी फीस कम की जानी चाहिए। अन्यथा इस पालिसी का फायदा सिर्फ अमीर लोग ही उठा पाएंगे जबकि गरीब व आम लोग इसका समुचित फायदा उठाने से वंचित रह जाएंगे। समिति के अनुसार प्रदेश में अलग-2 जिलों के शहरों के लिए अलग-2 डिवेलपमेंट प्लान बनाए गए हैं। जिनमें मंजिलों की संखया और सेट बैक के लिए अलग-2 नियम लागू किये गए हैं। शिमला में जहां फ्रंट सेटबैक 2 मीटर है और अन्य 1.5 मीटर तो वहीं पर मंडी में 3 मीटर और 2 मीटर के सैटबैक नियम हैं। उसी तरह मंजिलों की संखया में भी विसंगति है। समिति ने मांग की है कि पूरे प्रदेश के लिए एक समान प्लान लागू किये जाएं और इनके नियमों में भी एकरूपता लायी जाए। इस अवसर पर शिव पाल परमार, वाई एल शर्मा, घनश्याम ठाकुर और स्थानीय लोगों की अगुवाई में तल्याहड क्षेत्र के लोगों ने भी नये अध्यादेश के बारे में अपनी आपत्तियां दर्ज करवाई। इधर, नगर नियोजक दिनेश लता गुलेरिया ने समिति तथा तल्याहड निवासियों की समस्याओं से विभाग को अवगत करवाने और उन्हे सुलझाने का आश्वासन दिया है।
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Sunday, 3 July 2016

मणिपुरी नर्तक संजीव भट्टाचार्य ने लूटी वाहवाही



मंडी। राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित प्रसिद्ध मणिपुरी नर्तक संजीव भट्टाचार्य ने मंडी के संगीत सदन में गीत गोविंद की प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। वह संगीत सदन में आयोजित नृत्यांगन क्रार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे। शास्त्रीय संगीत के लिए समर्पित मंडी की संस्था संगीत सदन की ओर से नृत्यांगना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति अवार्ड से सममानित संजीव भट्टाचार्य और हिमाचल प्रदेश के प्रथम कथक स्नातकोतर दिनेश गुप्ता को संगीत सदन के संचालक उमेश भारद्वाज ने शॉल और स्मृति चिन्ह दे कर सममानित किया। कार्यक्रम के दौरान संजीव भट्टाचार्य ने मणिपुरी नृत्य शैली में राधा कृष्ण पर आधारित गीत गोविंद के पद पर अपनी नृत्य प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति को दर्शकों से बहुत सराहना मिली। कार्यक्रम में दिनेश गुप्ता ने कथक नृत्य पर चर्चा की और कृष्ण भजन की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके अलावा संगीत सदन के शिष्यों ने भी अपने नृत्यों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर संगीत सदन की ओर से उमेश भारद्वाज ने विशेष अतिथि भट्टाचार्य, दिनेश गुप्ता तथा सभी दर्शकों का कार्यक्रम में मौजूद रहने के लिए धन्यावाद और आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की सांस्कृतिक गतिविधियों भविष्य में भी जारी रखी जाएंगी।
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Saturday, 2 July 2016

कोठीगैहरी स्कूल में प्री मानसून पौधारोपण हुआ


मंडी। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कोठीगैहरी में प्री मानसून पौधारोपण किया गया। जिसका शुभारंभ पाठशाला की प्रधानाचार्य सिकंदर सिंह जसवाल ने परिसर में पौधा लगा कर किया। इस अवसर पर उन्होने कहा कि पर्यावरण को बचाना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है। जिसके लिए बच्चों को न केवल पौधारोपण करना चाहिए बल्कि रोपे गए पौधों को संरक्षित भी करना चाहिए। इस अवसर पर बच्चों ने अध्यापकों के निर्देशन में स्कूल परिसर में फलदार एवं फूलों वाले पौधे रोपित किये। इस मौके पर स्कूल की चारदीवारी के नजदीक उगे भांग के पौधों को उखाड कर नष्ट कर दिया गया। इस कार्यक्रम में ईको कल्ब के प्रभारी सूरज कुमार एवं सह प्रभारी कांता ढिल्लो ने पौधारोपण कार्यक्रम का संचालन किया।
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करोड़ों की राशि मिली पर पक्की नहीं हुई जिभी-गाड़ागुशैणी सड़क



मंडी। सराज घाटी की जिभी से गाडागुसैणी सडक करीब एक दशक पहले करोडों की राशि मिलने के बावजूद अभी तक पक्की नहीं बन पायी है। हालांकि इस दौरान विभाग ने आठ बार सडक बनाने के लिए निविदाएं जारी की है। सूचना के अधिकार के तहत दखल पर अब विभाग ने हरकत में आते हुए नवीं बार निविदाएं करवा कर शीघ्र कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता और जिला परिषद के सदस्य संत राम और एडवोकेट सुशील चौहान के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को इस सडक के शीघ्र निर्माण कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग के मध्य जोन के मुखय अभियंता को ज्ञापन सौंपा है। संत राम ने बताया कि जिभी से गाडागुसैणी सडक को पक्का और चौडा करने व इसके रखरखाव के बारे में उन्होने लोनिवि के अधिशाषी अभियंता कुल्लू से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। जिसमें मिली जानकारी से पता चला है कि इस सडक को प्रधानमंत्री सडक योजना के तहत पक्का और चौडा करवाने के लिए साल 2007-08 में 479.81 लाख रूपये की राशि स्वीकृत हुई है। लेकिन विगत करीब एक दशक में सडक को पक्का व चौडा करने, पैरापिट बनाने व इसका रखरखाव करने के लिए जारी की गई राशि अभी तक खर्च नहीं की जा सकी है। सूचना से खुलासा हुआ है कि इस कार्य को पूरा करने के लिए विभाग की ओर से अभी तक आठ बार निविदाएं आमंत्रित की गई थी। लेकिन ठेकेदारों के रेट स्वीकृत राशि से अधिक होने के कारण यह कार्य शुरू नहीं किया जा सका। संत राम ने बताया कि आरटीआई के तहत सूचना मांगन के बाद विभाग हरकत में आया है और विभाग की ओर से नवीं बार निविदाएं आमंत्रित की गई है। विभाग ने इस बार एक ठेकेदार की निविदा को स्वीकार करके निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू की दी है। उन्होने कहा कि यह सूचना के अधिकार का ही दवाब है कि विभागीय अमला सडक को पक्का और चौडा करने के लिए बाध्य हुआ है। इधर, मुखय अभियंता ने प्रतिनिधिमंडल को सडक का कार्य शीघ्रातिशीघ्र करने का आश्वासन दिया है।
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मंडी में बनाया जाए आधुनिक पुस्तकालयः शहीद भगत सिंह विचार मंच

मंडी। प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मंडी में आधुनिक और बेहतरीन पुस्तकालय के निर्माण की मांग की गई है। इस संदर्भ में शहर की संस्...