Saturday, 7 June 2014

डीपीई संघ का प्रतिनिधिमंडल प्रधान सचिव से मिला


मंडी। हिमाचल प्रदेश डीपीई संघ के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ (हिप्रराअस) की अगुवाई में शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अली रजा रिजवी से मिला। इस प्रतिनिधिमंडल ने डीपीई संघ की ग्रेड पे, वेतन विसंगतियों व अपनी दूसरी मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में हिप्रराअस के प्रधान वीरेन्द्र चौहान, महासचिव दिनेश शर्मा, डीपीई संघ मंडी के प्रधान अनिल पठानिया, महासचिव रमेश ठाकुर व संघ के अन्य सदस्य शामिल थे। डीपीई संघ के मीडिया प्रभारी प्रदीप भारद्वाज ने हिप्रराअस के सभी पदाधिकारियों का समर्थन देने व उनकी मांगों को विभिन्न मंचों पर उठाने के लिए प्रदेश के सभी डीपीई की ओर से धन्यावाद किया है। उन्होने जानकारी देते हुए बताया कि शीघ्र ही संघ शिक्षा वित सचिव के समक्ष भी अपनी मांगों को रखेगा।

La Jornada


La Jornada From Wikipedia, the free encyclopedia Jump to: navigation, search This article is about the Mexican newspaper. For the Nicaraguan newspaper, see La Jornada (Managua). La Jornada Typical front page of La Jornada Type Daily newspaper Format Compact Publisher Desarrollo de Medios S.A. de C.V. Editor Carmen Lira Saade Founded 1984 Language Spanish Headquarters Mexico City, Mexico Circulation National Official website www.jornada.unam.mx La Jornada is one of Mexico City's leading daily newspapers[according to whom?]. It was established in 1984 by Carlos Payán Velver. The current editor (directora general) is Carmen Lira Saade. La Jornada has presence in seven states of the Mexican Republic with local editions in Guerrero, Jalisco, Michoacán, Morelos, San Luis Potosí, Puebla and Veracruz (La Jornada de Oriente). It has approximately 287,000 readers in Mexico City,[1] and, according to them, their website has approximately 180,000 daily page views.[2] The online version was launched in 1995, with no restrictions on access and a Google-based search that includes the historic archives of the newspaper. The website is hosted by the National Autonomous University of Mexico (UNAM). Noam Chomsky has described La Jornada as "maybe the only real independent newspaper in the hemisphere".[3][4] Contents [hide] 1 Contributors 2 Criticism 3 External links 4 References Contributors[edit] Many of the newspaper's editorialists have academic affiliations with the UNAM or the Colegio de México.Julio Hernández López Jose Steinsleger Eduardo Galeano (former contributor) Miguel Angel Rivera Carlos Fernández-Vega Alfredo Jalife Rahme Julio Boltvinik Kalinka Marlene Santos Patricia Peñaloza Mario Di Costanzo Gustavo Iruegas Iván Restrepo Antonio Helguera Arnoldo Kraus Enrique Galvan Ochoa Carlos Fazio Gustavo Esteva León Bendesky Elena Poniatowska Hermann Bellinghausen José Cueli Leonardo Garcia Tsao Mario Benedetti Carlos Monsivais John Saxe Fernandez Abraham Nuncio Limón It occasionally translates and includes op-eds from Robert Fisk, Noam Chomsky, James Petras, Howard Zinn, Greg Palast and others. Fidel Castro has also repeatedly contributed to the newspaper as an author. Criticism[edit] This section is empty. You can help by adding to it. (November 2013) External links[edit] (Spanish) Official website English translations of La Jornada articles available at nonprofit WorldMeets.US References[edit] Jump up ^ Pulso: Articulos Nuevos Jump up ^ Introducción Daily page views according to La Jornada Jump up ^ Borpujari, Priyanka (6 July 2013). "What is striking in India is the indifference of the privileged: Chomsky". Tehelka. Retrieved 2013-07-02. Jump up ^ Chomksy, Noam (Oct 6, 2009). Chomsky: US Supported Indian, Pakistani Nuclear Programs (Conference). San Francisco, CA: FORA.tv. Categories: Newspapers published in Mexico Spanish-language newspapers Media in Mexico City Navigation menu Create account Log in Article Talk Read Edit View history Main page Contents Featured content Current events Random article Donate to Wikipedia Wikimedia Shop Interaction Help About Wikipedia Community portal Recent changes Contact page Tools What links here Related changes Upload file Special pages Permanent link Page information Data item Cite this page Print/export Create a book Download as PDF Printable version Languages Español Français Bahasa Indonesia Nederlands Polski Português Svenska Edit links This page was last modified on 9 November 2013 at 18:27. Text is available under the Creative Commons Attribution-ShareAlike License; additional terms may apply. By using this site, you agree to the Terms of Use and Privacy Policy. Wikipedia® is a registered trademark of the Wikimedia Foundation, Inc., a non-profit organization.

Wednesday, 4 June 2014

Save our environment


Every day we see pollution all around us. Unknown to us, many species of animals live in fear of extinction due to pollution. Our government, as well as those of other countries, has imposed laws that forbid mankind to hunt endangered animals, such as tigers. Our main source of oxygen, the trees, are also dying by the thousands every day. Scientific research has shown that the temperature of the Earth has risen to an alarming figure during the past few years. It will most probably rise further if we do not stop polluting the environment. In recent years, many forests have been burnt because of the extremely hot weather. Neighbouring countries have also been affected by these forest fires and resulting haze. Vehicles on the road every day produce huge amounts of hazardous and poisonous gases and billowing clouds of smoke. This will damage the Earth and allow ultra violet rays to penetrate the Earth's atmosphere, thus endangering the lives of humans. People are also living in fear of the Earth being flooded by torrents of melted ice from the North and South poles. Nature societies and governments have encouraged people of all races and from all over the world to lend a helping hand in saving Mother Nature. We would only have to cut down on our usage of paper napkins, buy less or perhaps not buy animal fur coats at all. Handbags, pouches, shoes an other accessories made of animal products should be avoided. Yet, people refuse to cooperate. Our beautiful surroundings will no longer remain the same, not because of anything, but because of the pollution that is happening every day, all around us. No longer will people enjoy sightseeing anymore, as the lovely and attractive scenery will be destroyed. Our future generations may not be able to recognise those cute little puppies and kitten, since there will be none of them roaming the streets. All the animals that our granddaughters and grandsons may see would be in zoo, or even worse, only in books!

Sunday, 1 June 2014

पैरा लीगल वालंटियर का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित


मंडी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उपायुक्त सभागार में बुधवार को पंचायतों में तैनात होने वाले पैरा लीगल वालंटियर का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसकी अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायधीश एस सी कैंथला ने की। इस अवसर पर उन्होने कहा कि राष्ट्रिय विधिक प्राधिकरण के निर्देशों के तहत सभी पंचायतों में ग्राम विधिक संरक्षण और सहायता केन्द्र शुरू किये जा रहे हैं। इन केन्द्रों का उदेश्य लोगों को विधिक जागरूकता, साक्षरता और सहायता मुहैया करवाना है। जिससे सभी को न्याय हासिल हो सके। उन्होने कहा कि पंचायतों में स्थापित होने वाले इन केन्द्रों में दो पैरा लीगल वालंटियर और एक रिटेनर लॉयर की तैनाती की जा रही है। इन केन्द्रों में नियुक्त होने वाले पैरा लीगल वालंटियर के प्रशिक्षण के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश (1) पदम सिंह ठाकुर ने हिंदू मैरिज, स्पैशल मैरिज, फैमिली कोर्ट, गार्जियन एंड वार्डस और हिंदू माइनोरिटी एंड गार्जियशीप एक्ट के बारे में पैरा लीगल वालंटियर को प्रशिक्षित किया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश (2) डी आर ठाकुर ने एस सी एंड एस टी (प्रिवेंशन आफ एटरोसिटी) एक्ट, मोटर वाहन अधिनियम और एक्सीडेंट में मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया तथा लेबर वेलफेयर कानूनों की जानकारी दी। मुखय न्यायिक दंडाधिकारी जिया लाल आजाद ने महिलाओं को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत गुजारा भता दिलाने, उन्हे घरेलू हिंसा से रोकने के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम, दहेज निरोधक अधिनियम और दहेज उत्पीडन के बारे में जानकारी दी। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर एक विवेक खेनाल ने प्रशिक्षु पीएलवी को उपभोक्ता संरक्षण, बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी व अधिकार, जुवेनाइल जस्टिस और वर्कमैन कंपनसेशन अधिनियम के बारे में जानकारी दी। न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट नंबर चार आकांक्षा डोगरा ने मौलिक अधिकार और कर्तव्य, एफआईआर, अरेस्ट, बेल और अपंग, वरिष्ठ नागरिकों तथा समाज के कमजोर तबकों के अधिकारों के बारे में बताया। अधिवक्ता समीर कश्यप ने लोक अदालतों, एडीआर प्रणाली, विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दी जाने वाली मुफत कानूनी सहायता, लीगल सहायता योजना के तहत चलाए जा रहे विधिक साक्षरता कैंप, माइक्रो कैंप, मनरेगा कैंप और पैरा लीगल वालंटियर की भूमिका और कत्र्वयों के बारे में जानकारी दी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला के सदर और बल्ह विकास खंड के 21 प्रशिक्षु पैरा लीगल वालंटियरों ने भाग लिया।

विधिक साक्षरता शिविर में दी कानून की जानकारी


मंडी। जिला विधिक सेवा समिति की ओर से मंगलवार को बिजणी पंचायत में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर एक विवेक खेनाल ने की। इस मौके पर उन्होने विधिक साक्षरता के महत्व और इसके उदेश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि कानूनों का अस्तित्व सामाजिक संरचना को व्यवस्थित करने के लिए नियम बनाने से आता है। उन्होने कहा कि जब समाज को नियमों में बांधा जाता है तो समाज विकासोन्मुखी हो जाता है। उन्होने कहा कि विधिक प्राधिकरण की ओर से लोगों को उनके रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित करने वाले कानूनों की जानकारी दी जाती है। उन्होने मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मोटर वाहन का प्रयोग करने से पहले लोगों के पास आवश्यक दस्तावेज लाइसैंस और इंश्योरेंस होना बहुत जरूरी होता है। इन दस्तावेजों के न होने की कीमत उस समय चुकानी पड सकती है जब वाहन से कोई दुर्घटना हो जाती है। उन्होने कहा कि दस्तावेजों की कमी के कारण जो मुआवजा बीमा कंपनी को अदा करना होता है उसे वाहन के मालिक या चालक को अदा करना पड जाता है। उन्होने मुफत कानूनी सहायता के बारे में बताया कि महिलाओं, अपंग, अनुसूचित जाति व जनजाति, आपदा प्रभावित व सामान्य वर्ग जिनकी आमदनी एक लाख रूपये तक हो उन्हें यह सहायता दी जाती है। शिविर में अधिवक्ता समीर कश्यप ने मनरेगा, सूचना के अधिकार, घरेलू हिंसा अधिनियम और श्रम कानूनों के बारे में जानकारी दी। उन्होने कहा कि मनरेगा से जहां लोगों को घरों के नजदीक रोजगार मुहैया हो रहा है वहीं पर सूचना के अधिकार से विभागों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। घरेलू हिंसा से प्रताडित महिलाएं संरक्षण अधिकारी के माध्यम से अपनी शिकायत अदालत में कर सकती है। उन्होने कहा कि असंगठित मजदूरों को पंजीकरण करवा कर श्रम कानूनों का लाभ प्राप्त करने चाहिए। स्त्रोत व्यक्ति के रूप में मौजूद शशी विवेक ने भ्रुण हत्या से संबंधित कानून की जानकारी दी। उन्होने कहा कि महिलाएं जिंदगी के रथ के दो पहियों में से एक अहम पहिया है। जिसके बगैर जीवन का रथ आगे नहीं बढ सकता। उन्होने कहा कि लडकियों को जन्म से पहले ही मार देने से समाज में महिलाओं का पुरूषों के मुकाबले अनुपात बहुत कम हो गया है। उन्होने कहा कि कन्या भ्रुण हत्या कानूनन अपराध है जिसमें आरोपी को सजा का प्रावधान भी है। शिविर में पंचायत प्रधान रणवीर सिंह, उपप्रधान हिमप्रभ, सदस्य मिहिर चंद, चंडी देवी, भूप सिंह, चंद्र रेखा, सावित्री और स्थानीय पंचायत निवासी मौजूद थे।

नया फ्रीज 30 दिनों में देने के आदेश


मंडी। जिला उपभोक्ता फोरम ने विक्रेता और निर्माता को उपभोक्ता के पक्ष में नया रैफरीजिरेटर (फ्रीज) 30 दिनों के भीतर देने का फैसला सुनाया। ऐसा न करने पर उपभोक्ता के पक्ष में इसकी मूल्य राशि 16,500 रूपये ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिये हैं। वहीं पर उनकी सेवाओं में कमी के कारण उपभोक्ता को हुई परेशानी के बदले 4000 रूपये हर्जाना और 2000 रूपये शिकायत व्यय भी अदा करने के आदेश दिये हैं। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष जे एन यादव और सदस्यों रमा वर्मा एवं आकाश शर्मा ने पैलेस कलौनी निवासी लवली नर्वदा पत्नी युगल किशोर की शिकायत को उचित मानते हुए विक्रेता सेरी बाजार स्थित मैसर्ज चंदन एंटरप्राइजिस और निर्माता चंडीगढ स्थित एल जी इलैक्ट्रोनिक्स के क्षेत्रीय प्रबंधक को निश्चित अवधि में नया फ्रीज न देने पर उक्त मूल्य राशि उपभोक्ता के पक्ष में 9 प्रतिशत ब्याज दर सहित अदा करने का फैसला सुनाया। अधिवक्ता पुष्प राज शर्मा के माध्यम से फोरम में दायर शिकायत के अनुसार उपभोक्ता ने विक्रेता से घरेलू उपयोग के लिए एक फ्रीज खरीदा था। जिसकी चार साल की वारंटी दी गई थी। लेकिन एक माह के भीतर ही इसमें कई खराबियां आ गई। उपभोक्ता ने विक्रेता को संपर्क करके उनके ध्यान में यह खराबियां लाई। जिस पर विक्रेता ने नागचला स्थित सर्विस सेंटर को खराबी दूर करने के लिए तैनात किया। लेकिन खराबी पूरी तरह से दूर तो नहीं हो सकी बल्कि इसके कूलिंग सिस्टम में भी खराबी आ गई। कई बार सर्विस इंजिनियर ने फ्रीज को ठीक करने की कोशीस की लेकिन इंजिनियर का कहना था कि फ्रीज में निर्माण से संबंधित खराबी है। ऐसे में उपभोक्ता ने फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि उपभोक्ता को विक्रय किये गए फ्रीज में एक माह के भीतर खराबी आ गई जिससे जाहिर होता है कि फ्रीज में निर्माण से संबंधित खराबी थी। फोरम ने कहा कि विक्रेता ने कार्यवाही में भाग नहीं लिया जिसके कारण उनके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की गई। फोरम ने कहा कि विक्रेता के कार्यवाही में भाग न लेने की कार्यप्रणाली से जाहिर है कि उन्हे इस मामले में कुछ नहीं कहना है और वह शिकायत को सही मानते हैं। फोरम ने वारंटी अवधि में खराब फ्रीज न बदलने को विक्रेता और निर्माता की सेवाओं में कमी करार देते हुए नया फ्रीज 30 दिनों में देने या मूल्य राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिये। जबकि उनकी सेवाओं में कमी के कारण उपभोक्ता को हुई परेशानी के बदले उक्त हर्जाना और शिकायत व्यय भी अदा करने का फैसला सुनाया।

सडक ठेकेदार पर गिर सकती है गाज


मंडी। औट-लुहरी राष्ट्रिय राजमार्ग पर धामण में सडक की कटाई से डंगे को हुए नुक्सान के मामले में कार्य करवा रहे ठेकेदार पर गाज गिर सकती है। प्रदेश के मुखय सूचना आयुक्त भीम सेन ने मंडी सर्किट के दौरान लोक निर्माण विभाग से इस मामले में 15 दिनों के भीतर सपष्टीकरण मांगा है। इधर, विभाग की ओर से न्यायलय को अवगत करवाया गया कि कार्य करवा रहे ठेकेदार से इस मामले में सपष्टीकरण मांगा गया है और उसके सारे बिलों का भुगतान रोक दिया गया है। उपतहसील बालीचौकी के सुधराणी निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट संत राम ने गत वर्ष 22 अक्तूबर को लोक निर्माण विभाग से सूचना मांगी थी कि औट-लुहरी राष्ट्रिय राजमार्ग पर धामण गांव के पास सडक की कटिंग को लेकर ठेकेदार के साथ हुए अनुबंध और मौका के निरिक्षण के बारे में जानकारी दी जाए। विभाग की ओर से उन्हे जवाब मिला कि इसके लिए 134 रूपये की राशि जमा करनी होगी। हालांकि प्रार्थी ने बीपीएल प्रमाण पत्र भी आवेदन के साथ संलग्न किया था। विभाग की ओर से आधी अधूरी सूचना देने पर उन्होने पहली अपील मुखय अभियंता मध्य जोन मंडी के पास की थी। जिसे अधीक्षण अभियंता कुल्लू को प्रेषित कर दिया था। अपील की सुनवाई में बताया गया कि कटिंग के इस कार्य के लिए 1,67,374 रूपये का टेंडर जारी किया गया है। जिसे दो माह में पूरा होना था। हैरानी की बात है कि विभाग ने माना कि इस कटिंग के दौरान सडक पर लगा लोक निर्माण विभाग की ओर से लगाया गया डंगा क्षतिग्रस्त हो गया है। डंगे के नुकसान का आकलन 1,76,700 के लगभग है। यहां सवाल खडा होता है कि यह कार्यप्रणाली कैसी है जहां पर काम की कीमत से ज्यादा नुकसान कर दिया गया है। प्रथम अपील के दौरान ही मौका का निरिक्षण भी विभाग की ओर से किया गया। लेकिन मौका के निरिक्षण की कोई रिर्पोट मौका पर तैयार नहीं की गई। ऐसे में प्रार्थी ने प्रथम अपील के फैसले को चुनौती देते हुए दूसरी अपील प्रदेश के मुखय सूचना आयुक्त भीम सेन के न्यायलय में दायर की थी। जिसकी सुनवाई आयुक्त के मंडी सर्किट के दौरान सोमवार को हुई। विभाग की ओर से अधिषाशी अभियंता मध्य जोन दीपक शर्मा और सहायक अभियंता लारजी न्यायलय में प्रस्तुत हुए। इस दौरान विभाग का कहना था कि उक्त ठेकेदार जब तक नुकसान की भरपाई नहीं करेगा तब तक उसके बिलों का भुगतान रोक दिया गया है। इधर, आयुक्त के न्यायलय ने सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान इस मामले में विभाग से 15 दिनों के भीतर सपष्टीकरण मांगा है। उन्होने अपील की अगली सुनवाई 19 जून को सुनिश्चित की है।

मंडी में बनाया जाए आधुनिक पुस्तकालयः शहीद भगत सिंह विचार मंच

मंडी। प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मंडी में आधुनिक और बेहतरीन पुस्तकालय के निर्माण की मांग की गई है। इस संदर्भ में शहर की संस्...