Friday, 29 July 2016

लारजी में चल रहे हॉट मिक्सर प्लांट पर एनजीटी ने लगा दी रोक



मंडी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने लारजी में चल रहे हॉट मिक्सर प्लांट के संचालन पर रोक लगा दी है। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में प्रदेश सरकार, वन विभाग, प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड और प्लांट के संचालक को नोटिस जारी करके उनसे अगली सुनवाई के लिए जवाब तलब किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार और न्यायिक सदस्य एम एस नांबियर की दिल्ली स्थित प्रिंसिपल बेंच ने बालीचौकी तहसील के सुधराणी (खलवाहण) निवासी संत राम पुत्र टेक सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए लारजी में चल रहे हॉट मिक्सर प्लांट के संचालक अजय पठानिया को प्लांट का किसी भी तरह से संचालन करने और इसे चलाने पर अगली तारीख तक रोक लगाने के निर्देश दिये हैं। ट्रिब्यूनल के प्रिंसिपल बेंच ने संत राम की याचिका पर 26 जुलाई को सुनवाई की। इस अवसर पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का कहना था कि लारजी के नजदीक नदी और रिहायशी इलाके में एक हॉट मिक्सर प्लांट प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति के बगैर चलाया जा रहा है। ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के बाद आदेश पारित करते हुए कहा कि इन तथ्यों के मदेनजर रखते हुए याचिका के साथ संलगन पिक्चरस व प्रदेश प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी नोटिस की रोशनी में प्लांट के संचालक को निर्देश जारी करके इसके संचालन और इसे किसी तरह चलाने पर रोक लगा दी है। इधर, याचिकाकर्ता संत राम ने प्लांट का संचालन बंद करवाने के लिए प्रदेश सरकार, प्रदुषण बोर्ड, वन विभाग और जिला पुलिस अधीक्षक को एनजीटी के आदेश को लागू करवाने के लिए ज्ञापन प्रेषित किया है। संत राम ने बताया कि विगत 2004 से लारजी के नजदीक लगभग तीन बीघा वन भूमि में अवैध रूप से हॉट मिक्सर प्लांट का संचालन किया जा रहा है। लेकिन अनेकों बार विभागों को शिकायत करने के बावजूद भी प्लांट का संचालन बंद नहीं हो सका है। हालांकि प्रदेश प्रदूषण बोर्ड ने भी संचालक को नोटिस जारी किए थे। इसके अलावा वन विभाग ने भी पबलिक परमिसिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है जो वनमंडलाधिकारी नाचन की अदालत में विचाराधीन है। लेकिन प्लांट का संचालन बंद न होने के कारण उन्होने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में यह याचिका दायर की है। उन्होने कहा कि उममीद है कि प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग ट्रिब्यूनल के आदेश को लागू करते हुए इस प्लांट का संचालन शीघ्रातिशीघ्र बंद करवाने में पहल करेंगे।
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Tuesday, 26 July 2016

चरस तस्करी में दो लोगों को दस साल, एक को 7 साल कारावास



मंडी। चरस तस्करी के दो मामलों में अदालत ने दो आरोपियों को दस-2 साल और एक आरोपी को 7 साल के कठोर कारावास की सजा का फैसला सुनाया है। इन सभी आरोपियों को कारावास के अलावा जुर्माना राशि भी अदा करनी होगी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश (दो) कृष्ण कुमार की विशेष अदालत (तीन) ने पंजाब के संगरूर जिला की धुरी तहसील के धर्मपुरा मुहल्ला निवासी बलविंदर सिंह पुत्र कृष्ण सिंह और ककरयाल (धुरी) गांव निवासी प्रकाश सिंह पुत्र बलवंत सिंह के खिलाफ मादक एवं नशीले पदार्थ अधिनियम की धारा 20 के तहत अभियोग साबित होने पर उन्हें दस-2 साल के कठोर कारावास और एक-2 लाख रूपये जुर्माने की सजा सुनायी है। जुर्माना समय पर अदा न करने पर उन्हे दो-2 साल की अतिरिक्त साधारण कारावास काटनी होगी। अभियोजन के अनुसार औट थाना पुलिस का दल एएसआई राज कुमार की अगुवाई में झलोगी के पास तैनात था। इसी दौरान कुल्लू की ओर से आ रही आरोपियों की जाइलो कार की तलाशी लेने पर इसमें रखे एक लिफाफे से 1.250 किलोग्राम चरस बरामद हुई थी। इस मामले में अभियोजन की ओर से 9 गवाहों के ब्यान दर्ज किये गए। एक अन्य मामले में इसी अदालत ने बिलासपुर जिला के जबली (रघुनाथपुर) गांव निवासी अनिल कुमार पुत्र कमल किशोर के खिलाफ 500 ग्राम चरस बरामद होने का अभियोग साबित होने पर उसे 7 साल के कठोर कारावास और 70,000 रूपये जुर्माने की सजा सुनायी है। जुर्माना समय पर अदा न करने की सूरत में उसे दो साल का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष के मुताबिक जोंिगन्द्रनगर थाना पुलिस का दल एएसआई गुरदयाल सिंह की अगुवाई में घटासनी से बरोट मार्ग पर जा रहा था। इसी दौरान फयुन गलू के पास घटासनी की ओर से आ रहे एक व्यक्ति ने पुलिस को देखकर भागने की कोशीश की। जिस पर पुलिस ने उक्त व्यक्ति को काबू किया तो उससे 500 ग्राम चरस बरामद हुई थी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उससे चरस के स्त्रोत के बारे में पूछताछ की तो उसने फयुन गलू के एक दुकानदार का नाम बताया था। पुलिस ने उसे भी हिरासत में लेकर दोनों के खिलाफ अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन की ओर से इस मामले में 7 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से इन मामलों की पैरवी लोक अभियोजक कुलभूषण अवस्थी ने की। अदालत ने अपने फैसलों में कहा कि अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपियों के खिलाफ संदेह की छाया से दूर अभियोग साबित हुआ है। हालांकि आरोपी दुकानदार के खिलाफ अभियोग साबित न होने के कारण उसे बरी कर दिया गया है। अदालत ने कहा कि ड्रग तस्करी के मामलों में इन दिनों भारी बढौतरी देखी जा रही है। जिससे बच्चों, युवाओं और समाज पर दुष्प्रभाव पड रहा है। ऐसे में अदालत ने आरोपियों से बरामद हुई चरस की मात्रा को देखते हुए उन्हें उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
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चैहटीगढ़ रोपा के लोगों को बताए कानूनी प्रावधान



मंडी। जिला विधिक प्राधिकरण की ओर से रविवार को द्रंग विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत चैहटीगढ़ रोपा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता मुखय न्यायिक दंडाधिकारी राजेश चौहान ने की। इस अवसर पर कानून की जानकारी देते हुए समीर कश्यप ने बताया कि प्राधिकरण की ओर से आयोजित होने वाले इन शिविरों का उदेश्य लोगों को रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाले कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना होता है। जिससे वह इन प्रावधानों का समुचित लाभ उठा सकें। उन्होने मनरेगा कानून के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जो मनरेगा श्रमिक एक साल में 50 दिन काम कर चुका हो वह श्रमिक कल्याण बोर्ड में अपना पंजीकरण करवा सकता है। इस पंजीकरण के बाद उन्हे सरकार की ओर से साइकिल, इंडक्शन, वाशिंग मशीन व अन्य वस्तुओं सहित कई तरह की आर्थिक सहायता मिलती है। सूचना के अधिकार के बारे में जानकारी देते हुए उन्होने बताया कि इससे लोगों के पास एक बडी ताकत हाथों में आयी है। किसी भी विभाग में आवेदन करने के बाद इसकी प्रतिलिपी प्राप्ती सहित अपने पास रख कर एक माह बाद आवेदन पर हुई कार्यवाही के बारे में सूचना पूछी जा सकती है। जिससे विभाग सबसे पहले सूचना के अधिकार के तहत पूछी गई सूचना को सबसे पहले मुहैया करने व आवेदन पर काम करने पर बाध्य हो जाते हैं। आरटीआई ने विभागों की पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभायी है। अधिवक्ता ललित ठाकुर ने मोटर वाहन अधिनियम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि वाहन खरीदने से पहले मालिक को इसे चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसैंस जरूरी बनाना चाहिए। इसके अलावा वाहन का पंजीकरण व इसका बीमा भी समय पर करवाना चाहिए। ऐसा न करने पर दुर्घटना हो जाने की सूरत में वाहन मालिक को भारी खामियाजा भुगतना पड जाता है। उन्होने बताया कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार है। उन्होने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सभी महिलाओं, अनुसूचित जाति व जनजाति, अपंग, फैक्टरी मजदूर, आपदा प्रभावित और एक लाख से कम आमदनी वाले सभी लोगों को मुफत कानूनी सहायता दी जाती है। इस मौके पर चैहटीगढ़ रोपा पंचायत के प्रधान प्रेम सिंह ठाकुर ने शिविर में आए विधिक सेवा प्राधिकरण के विशेष अतिथियों का हिमाचली टोपी पहना कर सममानित किया। उन्होने मुखय न्यायिक दंडाधिकारी व विशेष अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि महिलाओं व बुजुर्गों के गुजारे भत्ते को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उसी तरह मनरेगा, आरटीआई और शिक्षा के अधिकार के लिए भी पंचायत सक्रियता से काम कर रही है। इस मौके पर पंचायत के उपप्रधान हरीश ठाकुर, औट पुलिस के अन्वेषण अधिकारी योगेन्द्र ठाकुर, पंचायत सचिव ओम चंद सहित वार्ड सदस्य, महिला मंडल और स्थानीय निवासी मौजूद थे।
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Friday, 22 July 2016

मीडिएशन से होती है पैसे व समय की बचत



मंडी। उपमंडल विधिक सेवा प्राधिकरण सुंदरनगर की ओर से वीरवार को मध्यस्थता (मिडिएशन) की जागरूकता के लिए न्यायलय परिसर में शिविर का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त मुखय न्यायिक दंडाधिकारी सुंदरनगर गौरव शर्मा ने की। इस अवसर पर उन्होने बार एसोसिएशन का आहवान किया कि मिडिएशन के माध्यम से मामलों के जल्द निस्तारण के लिए याचिकाकर्ताओं को प्रेरित करें। उन्होने कहा कि मिडिएशन से मामलों को जल्दी निस्तारण से उनकी ऊर्जा, समय, पैसे की बचत होती है। उन्होने बताया कि मिडिएशन के तहत सुलझाए गए मामलों में दोनों पक्षों की जीत होती है और विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। इस अवसर पर न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर दो कुलदीप शर्मा ने कहा कि मिडिएशन मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए एक आधुनिक माध्यम है। जिसमें प्रशिक्षित मिडिएटर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा कर उनके विवाद को सुलझाने की कोशीश करता है। उन्होने कहा कि इस प्रक्रिया में अधिवक्ता वर्ग की लोगों के हितों का ध्यान में रखते हुए उनके मामलों को सुलझाने की बडी जिममेवारी है। ऐसे में अधिवक्ता ही लोगों को मिडिएशन की उपयोगिता बताने में अपनी सबसे अहम भूमिका निभा सकते है। इस अवसर पर प्रशिक्षित मिडिएटर समीर कश्यप ने मिडिएशन के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से मामले का निस्तारण दोनों पक्ष खुद अपनी शर्तों और नियमों पर करते हैं। जिससे यह फैसला टिकाऊ होता है और धरातल पर भी लागू हो जाता है। उन्होने कहा कि मिडिएशन के माध्यम से मामले सुलझाने में सबसे अहम भूमिका अधिवक्ता निभा सकते हैं क्योंकि लोग अपने अधिवक्ता की राय पर ही सबसे ज्यादा यकीन करते हैं। इस अवसर पर बार एसोसिएशन सुंदरनगर के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह ठाकुर ने प्राधिकरण का शिविर आयोजित करने के लिए धन्यावाद किया। शिविर में एसोसिएशन के महासचिव बी एस सांखयान, एडवोकेट लाल सिंह राणा, चौधरी, विक्रांत सिंह, विकास शर्मा, उमेश भारद्वाज, मनु सेन, एच सी शर्मा, चंदेल, आशीष सेन और चंदन गुप्ता सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
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मंडी में बनाया जाए आधुनिक पुस्तकालयः शहीद भगत सिंह विचार मंच

मंडी। प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मंडी में आधुनिक और बेहतरीन पुस्तकालय के निर्माण की मांग की गई है। इस संदर्भ में शहर की संस्...