मंडी। सुंदरनगर की अकादमी आफ मार्शल आर्टस ने आसपास की पहाडियों पर 20 किलोमीटर का ट्रैकिंग टुअर आयोजित किया। इस एक दिवसीय ट्रैकिंग में कराटे के 30 छात्रों ने भाग लिया। छठी डिग्री ब्लैक बैल्ट सेनसुई महेश चंद्र शर्मा जो पिछले करीब 20 सालों से सुंदरनगर में अकादमी आफ मार्शल आर्टस के माध्यम से कराटे सिखा रहे हैं ने बताया कि कराटे छात्रों ने सुंदरनगर शहर से केरन गांव तक पैदल यात्रा की। इसके बाद उन्होने आसपास की तीन पहाडियों तक ट्रैकिंग की। इस दौरान छात्रों को वन क्षेत्र तरांबडी में वन संपदा और मोर आदि वन्य जीवों को भी नजदीकी से देखने का मौका मिला। छात्रों ने जंगल की लकडियां इकठी करके अपना खाना बनाया और सुंदरनगर को वापसी की यात्रा से पहले पहाडी की गोद में कराटे के गुर सिखे। महेश चंद्र शर्मा ने बताया कि इस ट्रैकिंग टुअर में 4 साल से 16 साल तक बच्चों सहित चार ब्लैक बैल्ट शामिल थे। प्रशिक्षण के तहत ब्लैक बैल्ट खिलाडियों ने पहाडियों को चढते और उतरते समय बच्चों को अपने कंधों पर उठाया हुआ था। छात्रों का पहाडी पर चढने का यह पहला अनुभव था। पहाडी की चोटी पर स्थित मूलक मैदान से छात्रों ने सुंदरनगर शहर के सुंदर नजारे का आनंद उठाया। छात्रों के अभिभावकों ने इस टुअर को शिक्षाप्रद बताते हुए कहा कि इसके जरिये छात्रों ने ट्रैकिंग, पहाडी चढना, वन्य जीवों और संपदा देखने के अलावा अपने आप खाना बनाकर पिकनिक करके पूरा आनंद उठाया। जो एक सराहनीय प्रयास है। छात्रों के मुताबिक उनमें से अधिकांश पहली बार किसी पहाड पर चढे और उतरे हैं। छात्रों को यह विश्वास नहीं हो रहा था कि उन्होने 20 किलोमीटर की ट्रैकिंग इतनी सहजता से पूरी कर ली हो। डीपीएफ तरांबडी में मोर, जंगली सुअर और प्रवासी पक्षियों को पहली बार देखना रोमांचक करने वाला अनुभव रहा। महेश चंद्र शर्मा ने बताया कि इस तरह के ट्रैकिंग टुअर राष्ट्रीय स्तर के कराटे कैंप में अक्सर आयोजित किये जाते हैं। लेकिन सुंदरनगर में कराटे छात्रों के लिए यह पहला प्रयास रहा।Tuesday, 3 December 2013
अकादमी आफ मार्शल आर्टस ने ट्रैकिंग टुअर आयोजित किया
मंडी। सुंदरनगर की अकादमी आफ मार्शल आर्टस ने आसपास की पहाडियों पर 20 किलोमीटर का ट्रैकिंग टुअर आयोजित किया। इस एक दिवसीय ट्रैकिंग में कराटे के 30 छात्रों ने भाग लिया। छठी डिग्री ब्लैक बैल्ट सेनसुई महेश चंद्र शर्मा जो पिछले करीब 20 सालों से सुंदरनगर में अकादमी आफ मार्शल आर्टस के माध्यम से कराटे सिखा रहे हैं ने बताया कि कराटे छात्रों ने सुंदरनगर शहर से केरन गांव तक पैदल यात्रा की। इसके बाद उन्होने आसपास की तीन पहाडियों तक ट्रैकिंग की। इस दौरान छात्रों को वन क्षेत्र तरांबडी में वन संपदा और मोर आदि वन्य जीवों को भी नजदीकी से देखने का मौका मिला। छात्रों ने जंगल की लकडियां इकठी करके अपना खाना बनाया और सुंदरनगर को वापसी की यात्रा से पहले पहाडी की गोद में कराटे के गुर सिखे। महेश चंद्र शर्मा ने बताया कि इस ट्रैकिंग टुअर में 4 साल से 16 साल तक बच्चों सहित चार ब्लैक बैल्ट शामिल थे। प्रशिक्षण के तहत ब्लैक बैल्ट खिलाडियों ने पहाडियों को चढते और उतरते समय बच्चों को अपने कंधों पर उठाया हुआ था। छात्रों का पहाडी पर चढने का यह पहला अनुभव था। पहाडी की चोटी पर स्थित मूलक मैदान से छात्रों ने सुंदरनगर शहर के सुंदर नजारे का आनंद उठाया। छात्रों के अभिभावकों ने इस टुअर को शिक्षाप्रद बताते हुए कहा कि इसके जरिये छात्रों ने ट्रैकिंग, पहाडी चढना, वन्य जीवों और संपदा देखने के अलावा अपने आप खाना बनाकर पिकनिक करके पूरा आनंद उठाया। जो एक सराहनीय प्रयास है। छात्रों के मुताबिक उनमें से अधिकांश पहली बार किसी पहाड पर चढे और उतरे हैं। छात्रों को यह विश्वास नहीं हो रहा था कि उन्होने 20 किलोमीटर की ट्रैकिंग इतनी सहजता से पूरी कर ली हो। डीपीएफ तरांबडी में मोर, जंगली सुअर और प्रवासी पक्षियों को पहली बार देखना रोमांचक करने वाला अनुभव रहा। महेश चंद्र शर्मा ने बताया कि इस तरह के ट्रैकिंग टुअर राष्ट्रीय स्तर के कराटे कैंप में अक्सर आयोजित किये जाते हैं। लेकिन सुंदरनगर में कराटे छात्रों के लिए यह पहला प्रयास रहा।
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