Friday, 20 January 2017

जिला बार एसोसिएशन मंडी के चुनाव कल होंगे





मंडी। जिला बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव आगामी 21 जनवरी को आयोजित होंगे। इस बार प्रधान पद के लिए पांच उममीदवार चुनाव मैदान में है। बार एसोसिएशन के चुनाव आयुक्त ललित कपूर, हितेश बहल, प्रितम ठाकुर और खेम राज ने बताया कि एसोसिएशन के चुनाव शनिवार को आयोजित होंगे। जिसमें प्रधान पद के लिए बिमल शर्मा, पंकज ठाकुर, विजय भंडारी, मयूर प्रकाश शर्मा और संजय मंडयाल ने अपनी दावेदारी जताई है। जबकि उपप्रधान पद के लिए दिनेश सकलानी और विखयात गुलेरिया चुनाव मैदान में हैं। महासचिव पद के लिए रूपेश उपाध्याय और अंशुल गुलेरिया के बीच मुकाबला होगा। वहीं पर सहसचिव पद के लिए संजय कुमार और समृति संदल ने नामांकन भरे हैं। चुनाव आयुक्त ललित कपूर ने बताया कि विभिन्न पदों के लिए नामांकन वापिस लेने की तारीख 18 जनवरी को थी। लेकिन प्रत्याशियों में सहमति न बन पाने के कारण अब 21 जनवरी को बार रूम में साढे दस बजे से तीन बजे तक मतदान करवाया जाएगा। उन्होने बताया कि मतदान प्रक्रिया के बाद शनिवार को ही चुनाव के परिणाम घोषित कर दिये जाएंगे।
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Thursday, 19 January 2017

रिवालसर में युवक मौत मामले की हो निष्पक्ष जांच





मंडी। रिवालसर में युवक की संदिगध मौत के मामले में स्थानीय वासियों ने जिला पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है। घौड पंचायत के स्थानीय वासियों के प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा को सोमवार को इस बारे में एक ज्ञापन सौंपा है। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार इस मामले में पुलिस ने घौड गांव निवासी किशोरी लाल पुत्र पदमनाभ को पुलिस हिरासत में लिया है। जबकि किशोरी लाल विगत 9 जनवरी की शाम को रिवालसर में अपने कार्य से घर लौट रहा था। इसी बीच रास्ते में कनवालू नाला के नजदीक लोगों की भीड खडी देखकर वह वहां पर रूका तो पता चला है कि कोई हादसा हुआ है। जब किशोरी लाल ने मृतक को देखा तो उसने पुलिस के सामने उसकी शिनाखत अपने दोस्त बंटी के रूप में की थी। जिसके बाद पुलिस उसे पुछताछ के लिए रिवालसर चौकी ले गई थी। जहां पर बाद में संदेह के आधार पर उसे हिरासत में ले लिया गया था। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि किशोरी लाल का इस मामले में कोई संबंध नहीं है और उसे गल्त तरीके से हिरासत में रखा गया है। उनके अनुसार अगर किशोरी लाल की इस मामले में कोई गल्त मंशा या संलिप्तता होती तो वह स्वयं मौकास्थल पर मृतक की शिनाखत अपने दोस्त के रूप में नहीं करता। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार किशोरी लाल आपराधिक प्रवृति का नहीं है और उसका चरित्र भी अच्छा है। ऐसे में उसे गल्त तरीके से हिरासत में लिया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने जिला पुलिस से मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए और संदेह के आधार पर गल्त तरीके से हिरासत में लिए गए किशोरी लाल को तत्काल रिहा किया जाए और इस मामले के असली दोषियों पर शिकंजा कसा जाए। प्रतिनिधिमंडल में घौड पंचायत के प्रधान दत्त राम, पदमनाभ, नागेश्वरी, भावना देवी, विश्वनाथ, इंद्र देव, शकुंतला देवी, रेखा देवी, लीला देवी, रमा देवी, रूप लाल, सुशील कुमार, नर्वदा देवी, दुर्गा देवी, बिमला देवी, पप्पू, प्रेमदेई, देविन्द्र, दिनेश, दुनीचंद, कुसुमा व चंपा सहित अन्य स्थानीय वासी शामिल थे। इधर, अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को निष्पक्ष जांच करने का आश्वासन देते हुए इस मामले को सुलझाने के लिए सहयोग देने का आग्रह किया है।
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Sunday, 15 January 2017

चित्रकला में धृति और शरण्या अव्वल




मंडी। जिला युवा सेवा एवं खेल विभाग के सौजन्य से शुक्रवार को संगीत सदन में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला लोक संपर्क अधिकारी हेमन्त शर्मा ने की। इस अवसर पर संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि हर वर्ष स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस के अवसर पर सप्ताह भर युवा उत्सव का आयोजन किया जाता है। उन्होने कहा कि स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेते हुए युवाओं को देश निर्माण में बढचढ कर भाग लेना चाहिए। इस अवसर पर अभियोजन विभाग से सेवानिवृत संयुक्त निदेशक विनोद चौधरी और पूर्व जिला न्यायवादी विनोद बहल विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे। संगीत सदन के संचालक उमेश भारद्वाज ने बताया कि इस मौके पर सीनीयर व जूनियर वर्ग की चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। चित्रकला प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में धृति शर्मा और जूनियर वर्ग में शरण्या विजेता रही। जबकि भाषण प्रतियोगिता में शहाना ने पहला स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर आयोजित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में संगीत सदन की ओर से बारहमासा व अन्य लोकगीतों की प्रस्तुतियां दी गई। मुखय अतिथि ने विजेताओं को प्रशस्ती पत्र तथा स्मृति चिन्ह देकर सममानित किया। उमेश भारद्वाज ने बताया कि संगीत सदन के छात्रों ने लोक समूह गान में जिला स्तरीय युवा उत्सव में प्रथम स्थान प्राप्त किया है और समूह गान का यह दल आगामी 17 जनवरी से नाहन में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय युवा महोत्सव में मंडी जिला का प्रतिनिधित्व करेगा। इस मौके पर शहर के गणमान्य नागरिक तथा संगीत सदन के अध्यापक व छात्र मौजूद रहे।
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टांडु पंचायत में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित





मंडी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को टांडु पंचायत में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता मुखय न्यायिक दंडाधिकारी राजेश चौहान ने की। इस अवसर पर उन्होने कहा कि इन शिविरों का उदेश्य लोगों को उनके रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाले कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना है। उन्होने बताया कि भारतीय संविधान में यह सपष्ट है कि देश का कोई भी नागरिक किसी भी आधार पर न्याय प्राप्त करने से वंचित नहीं होना चाहिए। जिसके चलते सभी नागरिकों को न्याय उपलब्ध करवाना सुनिश्चित बनाने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से मुफत कानूनी सहायता का प्रावधान है। उन्होने कहा कि सभी महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, अनुसूचित जाति व जनजाति, फैक्टरी मजदूर, आपदा प्रभावित, अपंग तथा सभी लोग जिनकी वार्षिक आय एक लाख रूपये से कम है वह मुफत कानूनी सहायता के पात्र है। उन्होने कहा कि सादे कागज पर अपने विवाद का संक्षिप्त विवरण देते हुए प्राधिकरण के कार्यालय को आवेदन करना होता है। जिसके बाद उन्हें केस लडने के लिए वकील तथा मुकद्दमे का सारा खर्चा प्राधिकरण की ओर से दिया जाता है। इस अवसर पर अधिवक्ता समीर कश्यप ने मनरेगा, सूचना का अधिकार, मध्यस्थता (मिडिएशन) और ग्रामीण विधिक संरक्षण एवं सहायता केंद्र के बारे में शिविर में मौजूद लोगों को जानकारी दी। इस अवसर पर ग्राम पंचायत टांडु की प्रधान हेम लता, यशोद्धानंद बजीर, एडवोकेट विनायक शर्मा, महीपाल, प्रेम सिंह, ओंकार सिंह भाऊ ठाकरे, संजय कुमार तथा अन्य स्थानिय वासी मौजूद थे।
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Monday, 9 January 2017

अधिवक्ता की कार का रास्ता रोकने, धमकी देने पर मामला दर्ज करने के आदेश




मंडी। अधिवक्ता की कार को गेट पर ताला लगाकर रास्ता रोकने और धमकी देने के मामले में अदालत ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिये हैं। अदालत ने पुलिस से मामले की जांच की रिर्पोट17 जनवरी को प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिये हैं। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर 4 अशोक कुमार के न्यायलय ने मंडी न्यायलय में कार्यरत अधिवक्ता रवि कुमार बधान पुत्र संत राम बधान निवासी गांव बैहना तहसील बल्ह की ओर से आपराधिक प्रक्रिया संहित की धारा 156 (3) के तहत दायर याचिका को स्वीकारते हुए इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिये हैं। जानकारी के अनुसार अधिवक्ता रवि विगत 28 सितंबर को मुखय डाकघर के नजदीक स्थित विदयुत बोर्ड के कार्यकारी अभियंता के कार्यालय में किसी कार्यवश गए थे। उन्होने कार्यालय में जाने से पुर्व परिसर में अपनी कार को पार्क किया। इसी दौरान वहां पर राजमहल होटल का एक वेटर आया और उन्हे कार्यालय परिसर में वाहन पार्क नहीं करने की धमकी देने लगा। उसका कहना था कि अगर कार नहीं हटाई तो वह कार्यालय को जाने वाली सडक पर लोहे की चेन लगा देगा। हालांकि अधिवक्ता ने उससे प्रार्थना की कि वह कार्यालय में कुछ जानकारी प्राप्त करने के बाद चला जाएगा। लेकिन होटल के वेटर ने धमकियां देना जारी रखा कि यह सरकारी आफिस नहीं है और यह निजी संपति है। अधिवक्ता कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय में गए लेकिन अधिकारी के मौजूद न होने के कारण उन्हें किसी कार्य के सिलसिले में कोर्ट जाना पडा। जब वह कोर्ट से लौटे तो यह देखकर हैरान रह गए कि उक्त कार्यालय को जाने वाली सडक पर चेन लगाकर ताला लगा दिया गया था और उनकी कार को भी परिसर में बंद कर दिया गया था। अधिवक्ता शाम करीब सवा चार बजे तक कार्यकारी अधिकारी का इंतजार करता रहा। उक्त अधिकारी के कार्यालय में आने पर उन्होने अधिवक्ता से कार्यालय में आने का कारण न पूछ कर उन्हें परिसर में कार पार्क करने को लेकर धमकाना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि अधिवक्ता वहां उनकी अनुमति के बगैर कार्यालय में कार पर नहीं आ सकता और न ही इसे यहां पार्क कर सकता है। अधिवक्ता का कहना था कि यह सरकारी कार्यालय है और वह बिजली की समस्या के बारे में बात करने कार्यालय आया था। अधिवक्ता ने उक्त अधिकारी से रास्ते पर लगाई गई चेन के ताले को खुलवाने और कार को जाने देने को कहा तो उनका कहना था कि ताले की चाबी राजमहल होटल के वेटर के पास होती है। इसके बाद उक्त अधिकारी कहीं चले गए और देर शाम करीब पौने छह बजे वापिस लौटे। उन्होने अपने एक कर्मी को चेन का ताला खोलने को कहा। इस कर्मी ने कार्यालय से चाबी लाकर चेन का ताला खोला। जिसके बाद अधिवक्ता अपनी कार सहित अपने घर जा सका। अधिवक्ता ने उक्त अधिकारी व वेटर द्वारा उनका रास्ता रोकने और धमकियां देने का आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायत दी थी। लेकिन पुलिस की ओर से उचित कार्यवाही न होने पर उन्होने अदालत में यह याचिका दायर करके प्राथमिकी दर्ज करने की गुहार लगाई थी। अदालत ने अधिवक्ता की याचिका को स्वीकारते हुए संबंधित थाना को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने तथा जांच की रिर्पोट 17 जनवरी को अदालत के समक्ष तलब करने के आदेश पारित किये हैं।
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Friday, 6 January 2017

हत्यारे पति को उम्रकैद की सजा और जुर्माना





मंडी। पत्नी के हत्यारोपी पति को अदालत ने कठोर उम्र कैद और 15,000 रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है। आरोपी के जुर्माना राशि को निश्चित समय में अदा न करने पर एक साल के अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश पूने राम पहाडिय़ा के न्यायलय ने सुंदरनगर तहसील के कुशला (जैदेवी) निवासी देवी राम पुत्र माघू राम के खिलाफ भादंस की धारा 302 और 201 के तहत हत्या करने और सबूत मिटाने का अभियोग साबित होने पर क्रमश: कठोर उम्र कैद और एक साल की कठोर कारावास तथा क्रमश: 10,000 व 5000 रूपये जुर्माने की सजा सुनायी है। आरोपी के जुर्माना राशि को निश्चित समय में अदा न करने पर क्रमश: एक साल और तीन महिने की अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार इस मामले के शिकायतकर्ता नारायणू के छोटे भाई आरोपी देवी राम की शादी करीब 10 साल पहले मंजीत कौर के साथ हुई थी। पती- पत्नी के बीच करीब पांच साल पहले भी मारपीट हुई थी। अभियोजन के अनुसार 29 अप्रैल 2013 को शिकायतकर्ता व आरोपी अपने परिवार सहित एक शादी में गए हुए थे। जब शिकायतकर्ता शादी में भाग लेने के बाद अपने घर लौट रहा था तो उसे नाले की ओर से आरोपी के रोने की आवाज सुनाई दी। जिस पर शिकायतकर्ता आरोपी के पास गया और नाले के पास आने की वजह पूछी तो उसने कहा कि वह गिर जाने के कारण यहां आया है। शिकायतकर्ता ने जब आरोपी से उसकी पत्नी कौशल्या के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह अपने मायके चली गई है। शिकायतकर्ता उसे नाले से उठाकर सडक पर लाया तो वहां अन्य लोगों की मौजूदगी में आरोपी ने कौशल्या के अपने ससुराल में ही होने की बात की। कौशल्या के बारे में आरोपी की विरोधाभासी बातों से संदेह होने पर शिकायतकर्ता ने गांव वासियों के साथ जंगल में कौशल्या को खोजने की कोशीश की तो वह घायल अवस्था में अचेत पडी हुई मिली। शिकायतकर्ता तथा स्थानीय वासियों ने दोनों को सुंदरनगर अस्पताल में पहुंचाया। जहां पर चिकित्सकों ने कौशल्या को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शिकायतकर्ता के ब्यान के आधार पर हत्या का मामला दर्ज करके तहकीकात शुरू की थी। पुलिस तहकीकात में यह सामने आया था कि आरोपी का आशू नामक एक लडकी के साथ अवैध संबंध था। जिसके कारण उसके पत्नी के साथ अच्छे संबंध नहीं थे और इसी कारण उसने कौशल्या की हत्या की थी। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए उप जिला न्यायवादी नवीन चंद्र ने 14 गवाहों के बयान कलमबंद करवा कर आरोपी के खिलाफ अभियोग को साबित किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ हत्या करने व सबूतों को मिटाने का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी को उम्र कैद और उक्त जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
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Monday, 2 January 2017

शहीद भगत सिंह व राधा मोहन गोकुल के लेख के प्रचार पर कार्यकर्ता गिरफ्तार, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमले का किया जोरदार विरोध



शहीद भगत सिंह व राधा मोहन गोकुल के लेख के प्रचार पर कार्यकर्ता गिरफ्तार
अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमले का किया जोरदार विरोध
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 क में यह सपष्ट किया गया है कि प्रत्येक देशवासी का यह कर्तव्य होगा कि वह स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करें। इसके अलावा सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझने और उसका परिरक्षण करने सहित वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन व सुधार की भावना का विकास करना भी हमारे कर्तव्य लक्षित हैं। इन कर्तव्यों की पूर्ति के लिए संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। लेकिन संविधान के इन कर्तव्यों का दायित्व करते हुए भी अक्सर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अक्सर हमले होते रहते हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ताजा हमले की सूचना लुधियाना से मिली है। पता चला है कि हिन्दी के चार्वाक कहे जाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी और साहित्यकार राधामोहन गोकुल और शहीद भगत सिंह के लेख “मैं नास्तिक क्यों हूँ” के जरिये नास्तिकता का प्रचार करने का आरोप लगाते हुए लुधियाना पुलिस ने टेक्सटाइल हौजरी कामगार यूनियन के नेताओं लखविंदर, समर और नौजवान भारत सभा की कार्यकर्ता बिन्नी सहित अन्य कार्यकर्ताओं को हिन्दू कट्टरपंथियों के दबाव में गिरफ्तार कर लिया है। पता चला है कि हिंदू कट्टरपंथियों ने पंजाब भवन लुधियाना में क्रांतिकारी और प्रगतिशील साहित्य की दुकान “जनचेतना” को आग लगाने की भी कोशिश की है। पाक्षिक पत्रिका प्रतिबद्ध ने भावनाओं को ठेस पहुंचाने के नाम पर अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला घोंटने के इस कार्य का जोरदार विरोध किया है। राधामोहन गोकुल जी और शहीद भगत सिंह हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्श हैं इसलिए इनके जीवन की शिक्षाओं का पालन करना हमारा कर्तव्य है। नास्तिकता की भी इस देश में एक प्राचीन परंपरा रही है। जनचेतना बेहतर जिंदगी के लिए बेहतर किताबों के अपने उद्देश्य को बडी शिद्दत से निभा रहा है। जनचेतना की सांस्कृतिक मुहिम में विश्व साहित्य के क्लासिकस, युवाओं के लिए पुस्तकें, मार्क्सवादी साहित्य, जीवनियां, संस्मरण और समकालीन ज्वलंत प्रश्नों पर पुस्तकें उपलब्ध रहती हैं। मंडी में गत वर्ष जनचेतना की पुस्तक प्रदर्शनी में ली गई पुस्तकों के पन्नों ने वास्तविकताओं को समझने की एक नयी दृष्टी दी है। अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमले के इस कृत्य की हम कडी निंदा करते हुए जोरदार विरोध व्यक्त करते हैं।
हिन्दी के चार्वाक थे राधामोहन गोकुल
Posted On August - 25 - 2012
साहित्य चिंतन
कृष्ण प्रताप सिंह
अपनी हिन्दी में एक अनूठे लेखक हुए हैं राधामोहन गोकुल। उन्होंने देश के भुला दिये गये भौतिकवादी चिन्तन की जुझारू और गौरवशाली परम्परा को कुछ इस तरह आगे बढ़ाया कि अपने समय में ही उनकी गिनती राष्ट्रीय जागरण के अनन्य श्लाका पुरुषों में की जाने लगी थी।


उल्लेखनीय है कि राधामोहन गोकुल ऐसे अनूठे लेखक थे जिन्होने देश के भुला दिये गये भौतिकवादी चिन्तन की जुझारू और गौरवशाली परम्परा को कुछ इस तरह आगे बढ़ाया कि अपने समय में ही उनकी गिनती राष्ट्रीय जागरण के अनन्य श्लाका पुरुषों में की जाने लगी थी। मुंशी प्रेमचन्द की मानें तो राधामोहन जी उन गिने हुए तत्कालीन लेखकों में से एक हंै जिन्होंने धार्मिक, सामाजिक और नैतिक विषयों पर न सिर्फ स्वतंत्र विचार किया बल्कि निडर होकर उन विचारों का पालन भी किया। मुंशी जी के शब्दों में ही कहें तो ‘राधामोहन गोकुल के विचारों में मौलिकता है, गहरा अन्वेषण और आदमी को कायल कर देने वाली सच्चाई है। आप जात-पांत, छूत छात व धर्म सम्प्रदाय इन सभी को समाज के लिए घातक और उसकी स्वाभाविक प्रगति में बाधक समझते हैं । आपकी दलीलों के सामने सिर न झुकाना कठिन है और लगता है कि आपके रूप में महात्मा चार्वाक ने ही फिर से अवतार लिया है।’
राधामोहन गोकुल का जन्म 15 दिसम्बर, 1865 को उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के पास स्थित भदरी रियासत के एक धर्मभीरु परिवार में हुआ था। उनके पूर्वज तत्कालीन जयपुर राज्य के खेतड़ी से चलकर वहां आये थे। परिवार में जारी परम्परा के अनुसार 13 वर्ष की उम्र में ही राधामोहन की शादी कर दी गयी और इस बाल विवाह का कुफल उन्होंने इस रूप में भोगा कि 1883 में उनके 18 वर्ष के होते- होतेे उनकी पत्नी का निधन हो गया और उन्होंने नया विवाह रचाने के बजाय आजीवन विधुर रहने का संकल्प ले लिया। शिक्षा पूरी होने के थोड़े दिनों बाद उन्हें इलाहाबाद में ही एक सरकारी नौकरी मिल गयी थी मगर अंग्रेज अधिकारी द्वारा किये गये अपमान से वे इतने क्षुब्ध हो गये कि उससे जमकर मारपीट करने के बाद कसम खा ली कि आईंदा गोरों की कोई नौकरी नहीं करूंगा।
सन् 1880 के आसपास बहुत छोटी उम्र में ही वे हिन्दी ‘प्रदीप’ के सम्पादक बालकृष्ण भट्ट और भारतेन्दु मंडल के दूसरे सदस्य प्रताप नारायण मिश्र के सम्पर्क में आ गये और जातिप्रथा व कूपमण्डूकता पर चोट करने वाले लेखन में प्रवृत्त हो गए थे। औपनिवेशिक दासता के विरुद्ध तो उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया। लेखन व पत्रकारिता इस संघर्ष में उनके दो बड़े हथियार बने। अलबत्ता, राजनीतिक सक्रियता का हथियार भी वे जब-तब आजमाते रहे। उनका मानना था कि भारतवासियों की रूढिय़ों व अन्धविश्वासों में प्रवृत्ति, अज्ञान और मानसिक दासता सब अंग्रेजों की औपनिवेशिक गुलामी के चलते ही है।
उन्होंने अपने समय की प्राय: सभी पत्रिकाओं में विपुल लेखन किया। ‘निराला’ के ‘मतवाला’ में उनके कई लेख प्रत्यक्षवादी छद्मनाम से भी छपे थेे। लेखन के अलावा उन्होंने ‘ब्राह्मण’, ‘समाजसेवक’ और ‘प्रणवीर’ नामक ऐतिहासिक दायित्व निभाने वाली पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। उनके जीवन पर नजर डालें तो रूढिय़ों के विरोध से शुरू हुई यात्रा आर्यसमाज में उनकी सक्रियता तक पहुंचकर भी थम नहीं गई। सन् 1920 तक वे कट्टर निरीश्वरवादी, जुझारू भौतिकवादी और उत्कट जनवादी व्यक्तित्व के तौर पर सामने आ चुके थे। राजनीतिक सक्रियताओं के क्रम में वे कांग्रेसी राजनीति के सीमान्तों का अतिक्रमण करते हुए, आगे चलकर , क्रान्तिकारी बने और साम्यवाद के प्रचार व कम्युनिस्ट पार्टी के गठन में भी भूमिका निभाई।
उनके निजी चिन्तन की विशेषता यह थी कि वे भारतीय चिन्तनपरम्परा की प्रतिगामी धारा को पूरी तरह खारिज करते हुए भी उसकी प्रगतिशील धारा की विरासत को आत्मसात् करने में हिचकिचाते नहीं थे। उनका कहना था कि इस विरासत को पाश्चात्य चिन्तन के क्रान्तिकारी, जनवादी, वैज्ञानिक और प्रगतिशील मूल्यों से जोड़कर भारतवासी अपने भविष्य का रास्ता बेहतर बना सकते हैं। अपने इन विचारों के लिए उन्होंने कई बार बड़ी-बड़ी कीमतें चुकायीं, जेल गये और नाना यंत्रणायें व त्रासदियां भोगीं।
सच पूछिए तो राधामोहन गोकुल उस अग्निधर्मी परम्परा के प्रवर्तक थे जिसे उनके बाद महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने आगे बढ़ाया। स्त्री की पराधीनता और आर्थिक वैषम्य को लेकर राधामोहन जी की बेचैनी और विद्रोह उनको चिन्तक और राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में सर्वथा अलग पहचान देते हैं। कहा जाता है कि भगत सिंह और शिव वर्मा आदि को वैज्ञानिक समाजवाद के विचारों तक पहुंचाने में भी राधामोहन गोकुल की अहम भूमिका थी। वे पूरे जीवन रासबिहारी बोस, शचीन्द्रनाथ सान्याल, चन्द्रशेखर आजाद, श्यामसुन्दर दास, गणेशशंकर विद्यार्थी, महावीर प्रसाद सेठ, मुंशी नवजादिकलाल श्रीवास्तव, शिवपूजन सहाय, किशोरीदास बाजपेयी और निराला के निकट सम्पर्क में रहे। मुंशी प्रेमचन्द से उनके रिश्ते तो आत्मीयता के स्तर तक थे। विचारों के स्तर पर उन्हें इस संसार में प्रकृति ही सबसे श्रेष्ठ और सुपाठ्य लगती थी और उनका मानना था कि उसके विरुद्ध जितने भी नियम हैं वे सब तिरस्कार के साथ ठुकरा देने योग्य हैं। वे कहते थे कि मनुष्य सोच समझकर अपने समाज का संगठन करे तो ईश्वर, राजा और कानून के बिना भी आनन्द के साथ रह सकता है।
वे कितने स्वाभिमानी थे, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि उर्दू की निम्नलिखित काव्य पंक्तियां उनका कण्ठहार थीं- सिजदे से गर बहिश्त मिले दूर कीजिए, दोजख सही पै सर का झुकाना नहीं अच्छा। सन् 1935 के सितम्बर महीने में बुन्देलखंड के सुदूर खोही अंचल में क्रांतिकारी जनजागरण करते हुए ऐसे ही स्वाभिमान के साथ उन्होंने अन्तिम सांस ली।
दुर्भाग्य से आज हिन्दी जगत ने अपने इस क्रान्तिकारी चिन्तक को पूरी तरह भुला दिया है। कर्मेन्दु शिशिर ने शायद इससे हुई क्षति को पूरा करने का उपक्रम करते हुए ही ‘राधामोहन गोकुल और हिन्दी नवजागरण’ नाम से एक पुस्तक लिखी है । साथ ही ‘राधामोहन गोकुल समग्र’ और ‘राधामोहन गोकुल की प्रतिनिधि रचनाएं’ नाम से उनकी रचनाओं को सम्पादित करके प्रकाशित किया है। इनके अतिरिक्त राहुल फाउन्डेशन, लखनऊ ने ‘ईश्वर का बहिष्कार’ नाम से राधामोहन गोकुल के लेखों की एक पुस्तिका प्रकाशित की है जबकि परिकल्पना प्रकाशन ने ‘लौकिक मार्ग’, ‘धर्म का ढकोसला’ और ‘स्त्री की स्वाधीनता’ नाम से तीन अलग-अलग पुस्तिकाएं। ‘संवेद’ नाम की लघुपत्रिका पिछले दिनों अपना एक अंक भी राधामोहन जी पर केंद्रित कर चुकी है। इनकी मार्फत नई पीढ़ी चाहे तो उनके सृजन तक अपनी पहुंच बना सकती है।
साभार- दैनिक ट्रिब्यून
शहीद भगत सिंह के लेख “मैं नास्तिक क्यों हूँ” के बारे में
भगत सिंह ने यह लेख 5-6 अक्तूबर, 1930 को लिखा था। यह पहली बार लाहौर से प्रकाशित अंग्रेज़ी पत्र ‘द पीपुल’ के 27 सितंबर 1931 के अंक में प्रकाशित हुआ था। इस महत्वपूर्ण लेख में भगतसिंह ने सृष्टि के विकास और गति की भौतिकवादी समझ पेश करते हुए उसके पीछे किसी मानवेतर ईश्वरीय सत्ता के अस्तित्व की परिकल्पना को अत्यन्त तार्किक ढंग से निराधार सिद्ध किया है।
साभार- भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़, राहुल फ़ाउण्डेशन लखनऊ
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मंडी में बनाया जाए आधुनिक पुस्तकालयः शहीद भगत सिंह विचार मंच

मंडी। प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मंडी में आधुनिक और बेहतरीन पुस्तकालय के निर्माण की मांग की गई है। इस संदर्भ में शहर की संस्...