Thursday, 23 October 2014

सेहली पंचायत प्रधान निलंबित


मंडी। निर्माण कार्य की राशि का दुरूपयोग करने पर जिला पंचायत अधिकारी ने ग्राम पंचायत सेहली के प्रधान भूरी सिंह को तुरंत निलंबित करने के आदेश जारी किये हैं। उन्होने प्रधान को पंचायत से संबंधित अभिलेख, धनराशि, चल या अचल संपति तुरंत पंचायत सचिव या सहायक को सौंपने के निर्देश दिये हैं। जिला पंचायत अधिकारी रमण कुमार शर्मा ने पंचायती राज अधिनियम के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रधान भूरी सिंह को जारी कारण बताओ नोटिस का तर्कसंगत और संतोषप्रद उतर न दे पाने पर इस पद से निलंबित करने का आदेश दिया है। विभिन्न प्रारंभिक जांच रिर्पोटों में आरोप सामने आने पर पंचायत प्रधान को यह नोटिस जारी किया गया था। संबंधित प्रधान की ओर से प्रस्तुत नोटिस का जवाब समीक्षा करने पर तर्कसंगत नहीं पाया गया। रिर्पोट के आरोपों के अनुसार दो कार्यों को करवाने के लिए 54164 और 32972 रूपये की राशि का दुरूपयोग करने में तकनीकी सहायक और पंचायत प्रधान का उतरदायित्व पाया गया है। रिर्पोट के आरोप तीन के तहत तथ्यों से जाहिर हुआ है कि प्रधान ने कार्य स्थल से पत्थर निकाले जाने के बाद स्टॉक में हिसाब नहीं रखा और न ही सारे विषय को पंचायत के ध्यान में लाया। डीपीओ ने अपने आदेश में कहा कि पंचायत प्रधान ने मस्ट्रोल उपयोग करने के बाद पंचायत में अदायगी के लिए जमा नहीं करवा कर अपने कर्तव्यों और दायित्वों का निर्वहन नहीं किया। प्रारंभिक रिर्पोट के एक अन्य आरोप की समीक्षा करने पर यह पाया गया कि उक्त प्रधान व दो अन्य लोगों ने पहले निशुल्क पत्थरों को उपलब्ध करवाने और बाद में उपलब्ध पत्थरों के बदले 400 रूपये प्रति ट्राली दिए जाने की सहमति अपने आप ही बना ली। हालांकि यह विषय पूरी ग्राम पंचायत के ध्यान में लाया जाना चाहिए था और इसका जिक्र पंचायत की बैठक की कार्यवाही में किया जाना चाहिए था। ऐसे में जिला विकास अधिकारी ने अपने आदेश में कहा कि उक्त प्रधान नोटिस के आरोपों के बारे में कोई ठोस और तर्कसंगत जवाब देने में असफल रहा है। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि प्रधान के पद पर बने रहने से जांच पर प्रतिकूल प्रभाव पडेगा और अभिलेख में गडबडी व साक्ष्यों से छेडछाड की आशंका बनी रहेगी। जिसके चलते उन्होने प्रधान को तत्काल निलंबित करने का आदेश देते हुए पंचायत के तमाम दस्तावेज व संपति पंचायत सचिव या सहायक को सौंपने के निर्देश दिये हैं। उल्लेखनीय है कि सेहली निवासी हिममत राम पुत्र दुर्गा ने इस बारे में 12 मई 2014 को इन आरोपों के संदर्भ में संबंधित कार्यालय में शिकायत दायर की थी। हिममत राम को प्रेषित कार्यालय आदेश की प्रति से जिला पंचायत अधिकारी के आदेश की पुष्टि हुई है।

Wednesday, 22 October 2014

मैंने देखा...



मैंने देखा...

मैंने देखा
बयास नदी को बंधते 
पंडोह और लारजी बांध में,
रोके हुए पानी को फैंकने से
पैदा हुई बिजली की
चमकती रोशनियों के बीच।
मैंने देखा
खूबसूरत झरने, सुंदर अगिनत वनस्पति
फूल, पौधे, जीव,जन्तु
दूधिया हरे रंग में
बार बार निहारने को
विवश करती
कल कल बहती
शांत बयास नदी
और इसकी सुरम्य घाटी।
पहाडों को काट कर बनी सडकें,
तीखी धुमावदार,
ऊंची-नीची, ढलानदार
रास्ते के देवस्थल
कठिन यात्रा के पहरेदार।
कितने साल लगे होंगे
बयास को अपने कोमल जल से
संकरी घाटी को चीरने में,
काटने में, घिसने में
और फिर आगे बढने में।
नदी किनारे की बडी बडी
चट्टानें लुढकाने में,
डवार तथा कंदराएं बनाने में।
नदी किनारे का ताजा बालू
एकबारगी सिहरन पैदा करता
8 जून 2014
याद दिलाता
हैदराबाद के इंजिनियरिंग
कालेज के 24 युवा छात्रों का
दल नदी की खूबसूरती से
वशीभूत
चट्टानों पर
गर्मी के मौसम में
कल कल बहते पानी की
ठंडी ब्यारों के आगोश में
पर्यटन का आनंद उठाता।
अचानक
लारजी बांध से आए
फलैश फल्ड का जलप्रवाह
जिंदगी की जदोजहद के बाद
सभी छात्रों को लीलता जाता।
हादसे को हो गए चार माह
तो भी नहीं बदली है राह।
मौका को तारें लगा दी हैं
कई जगह चेतावनी दर्शा दी है
पर नदी तट के सौंदर्य का क्या करें...
वह तो अटखेलियां को
हर बार भरमाता,
सम्मोहन में खींचा सा
हर कोई नदी तट में
उतरता जाता।
नहीं समझ पाता कि
भाई यह जीवनदायनी नदियों की
मर्यादा हनन का दौर है।
बयास नदी विपाशा है
पाश को तोडने वाली।
माना कि
बांध आधुनिक विज्ञान का
मानवीय आविषकार है।
तो फिर इससे
मानव जीवन की सुरक्षा का
क्यों कर परिष्कार है।
समीर कश्यप
22-10-2014
sameermandi@gmail.com
9816155600

Monday, 20 October 2014

तुम हो कि


तुम हो कि
तुम हो कि चारों ओर
एक खलबलाहट है मानो,
जैसे ठहरे पानी में
तरंगों की टकराहट है मानो,
उबल पड़ने को है आंख, कान, दिमाग से
पिघलते लावे का दरिया है मानो...

Sunday, 19 October 2014

सात चरस तस्करों को 14-14 साल की जेल, एक लाख जुर्माना


मंडी। चरस तस्करी का अभियोग साबित होने पर अदालत ने सात आरोपियों को चौदह-चौदह साल के कठोर कारावास और एक-एक लाख रूपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है। आरोपियों के जुर्माना राशि निश्चित समय में अदा न करने पर उन्हे एक-एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश पदम सिंह ठाकुर की विशेष अदालत (दो) ने जिला कुल्लू की बंजार तहसील के फरयारी (गुशैणी) निवासी पदम सिंह ठाकुर पुत्र ठाकुर सिंह और टिंडर (गुशैणी) निवासी जय सिंह पुत्र उदय सिंह के खिलाफ मादक एवं नशीले पदार्थ अधिनियम की धारा 20 के तहत अभियोग साबित होने पर उक्त सजा सुनाई है। जबकि हरियाणा के गुडगांव जिला के खवासपुर (जमालपुर) निवासी संजय कुमार पुत्र धरम पाल, जिला कुल्लू के घलियार (बटाहर) निवासी रोशन लाल पुत्र लौंगु राम, गुडगांव जिला के जूडोणा (पटाली) निवासी रवि कुमार पुत्र रमेश चंद, जमालपुर (पटौडी) निवासी संदीप कुमार पुत्र भगवान सिंह और वैशाली बिहार जिला के डिगी चाटी (हाजीपुर) निवासी दीपक कुमार पुत्र महेन्द्र सिंह के खिलाफ धारा 29 के तहत तस्करी में आपराधिक षडयंत्र के तहत संलिप्त होने का अभियोग साबित होने पर उक्त कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार स्टेट सीआईडी के भ्राडी (शिमला) थाना का दल प्रभारी निरिक्षक दीप राम की अगुवाई में मंडी, औट और बंजार में चरस तस्करी की सूचना एकत्र करने के लिए तैनात था। पुलिस दल 5 दिसंबर 2012 को तडके तीन बजे बंजार जाने वाली सडक पर लारजी से तीन किलोमीटर आगे तैनात था तो उन्हे गुप्त सूचना मिली कि आरोपी एक इंडिगो कार में चरस की तस्करी कर रहे हैं। जिस पर पुलिस ने नाका लगाकर कार को रोका तो इसकी तलाशी लेने पर एक बोरी में 15 किलोग्राम 450 ग्राम चरस बरामद हुई थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मादक एवं नशीले पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज करके अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से उप जिला न्यायवादी चंपा सुरील ने इस मामले में पैरवी की। मामले को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाहों के बयान कलमबंद किए गए। जबकि बचाव पक्ष की ओर से भी चार गवाहों के बयान दर्ज किये गए। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपियों के खिलाफ मादक पदार्थ की तस्करी करने और इसके लिए आपराधिक षडयंत्र के तहत संलिप्त रहने का अभियोग संदेह की छाया से दूर अभियोग साबित हुआ है। अदालत ने फैसले में कहा कि चरस तस्करी के अपराध से समाज पर पडने वाले दुष्प्रभाव को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जिसके चलते अदालत ने आरोपियों को उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।

Saturday, 18 October 2014

सड़कों के निर्माण में करोड़ों के घोटाले का अंदेशा


मंडी। हिमाचल प्रदेश असैंबली के चुनावी साल 2012 में सराज विधानसभा क्षेत्र में हुए सडक़ों के ताबडतोड उदघाटनों में करोडों रूपये का घोटाला होने का अंदेशा है। इस दौरान जिन सडकों का उदघाटन हुआ है उनमें अधिकांश सडकें न तो आज दिन तक पूरी हो पाई हैं और न ही लोगों को इन सडकों पर बस सुविधा मुहैया हो पाई है। कागजों में इन सडकों के निर्माण कार्य में करोडों रूपये खर्च करके ये कार्य पूर्ण कर लिए दर्शाए गए हैं। लेकिन आलम यह है कि इन सडकों पर बस चलाना तो दूर दुपहिया वाहन भी नहीं चलाए जा सकते। सडकों का कार्य पूरा न हो पाने के कारण अब मनरेगा के पैसे से इन्हे रिपेयर किया जा रहा है। इस घोटाले का खुलासा आरटीआई से मिली सूचनाओं में हुआ है। सुप्रसिध आरटीआई कार्यकर्ता संत राम ने लोक निर्माण विभाग के गोहर उपमंडल में वर्ष 2012 के चुनावी साल में क्षेत्र में लोर्कापित हुई 20 सडकों से संबंधित जानकारी मांगी थी। उदघाटन के बाद इन सडकों पर बसें न चलने पर उन्होने हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम से यह सूचना मांगी थी कि इन 20 सडकों में किन किन सडकों पर परिवहन निगम की बसें चलाई जा रही हैं। जिस पर निगम ने बताया कि मात्र तीन सडकों पर ही बसें चलाई जा रही हैं। इसके बाद लोनिवि गोहर से एक बार से सूचना मांगी गई कि इन सडकों पर बस सेवा क्यों शुरू नहीं की गई है। जिस पर विभाग का कहना था कि बारिश और बर्फबारी अधिक होने के कारण सडकों को नुकसान पहुंचा है। विभाग का कहना था कि सडकों को जल्द ठीक कर यातायात बहाल किया जाएगा। इसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता संत राम ने सूचना के अधिकार के तहत कुछ सडकों का मौका निरिक्षण लोनिवि के अधिकारियों के साथ किया। इस निरिक्षण के दौरान लोनिवि ने यह स्वीकार किया कि सडकें डीपीआर के मुताबिक नहीं बनी हैं और न ही इनका ग्रेड ठीक है। इनकी चौडाई, पैरापिट, नालियों व अन्य मापदंडों को पूरा नहीं किया गया है। विभाग ने निरिक्षण रिर्पोट में माना कि सडकें यातायात योगय नहीं हैं। संतराम ने बताया कि हैरत अंगेज यह है कि सडकों को पास करने से पहले बस ट्रायल के लिए बनाई गई कमेटी की रिर्पोट में इन सडकों को यातायात के लिए योगय दर्शाया गया था। इन सडकों पर सिर्फ उदघाटन के दिन ही बसें चली हैं। इसके बाद से यह सडकें औचित्यहीन हो गई हैं। उन्होने बताया कि साल 2012 में जब विधान सभा के चुनाव सिर पर थे तो क्षेत्र की करीब दो दर्जन आधी अधूरी सडकों का उदघाटन किया गया था। प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के तहत बनी स्याज-कासण, संपर्क सडक शिल्हणु, तांदी-नांडी, बूंग-भलवाड, थुनाग-जैंसला, बौन्छडी-कांढा, गाडा गुसैण-टपणाली, थाची-चलौंट-नारायण गलू-डीडर-खूहन-डीडर, कुकलाह-बागी-कशिमलीधार और नाबार्ड के तहत थलौट-पंजाईं, सुधराणी-थाटा, बगस्याड-रहीधार-धनशाल, जरोल-जुघांद-चाकूधार तथा एससीसीपी के तहत कांढा-बडीण-बगस्याड, बगस्याड-परवाडा, गधिमण-थाची-तनेल, मौवीसेरी-छपराहण जबकि ओटीएमएनपी के तहत धरोट-मंडप- बस्सी, थुनाग-बनयाड-मंडैलू सडक का निर्माण हुआ था। सूचना के मुताबिक विभिन्न ठेकेदारों के माध्यम से बनाई गई इन सडकों के निर्माण पर 20 करोड 99 लाख दो हजार अठतीस रूपये खर्च किये गए। संतराम ने बताया कि इन सूचनाओं को एकत्र में उन्हे भारी जदोजहद का सामना करना पडा। जिसके चलते उन्होने प्रदेश सूचना आयुक्त के पास लोनिवि और एचआरटीसी विभाग के सूचना मुहैया न करवाने पर दूसरी अपील दायर करनी पडी। इन अपीलों की सुनवाई के बाद राज्य मुखय सूचना आयुक्त भीम सिंह ने 21 अगस्त 2013 को सुनाए फैसले में यह कहा है कि ये सडकें यातायात मानकों के अनुरूप नहीं हैं। आयुक्त ने इन सडकों के यातायात मानकों को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार को निर्देश जारी किए थे। लेकिन इन निर्देशों के पालन के बारे में सरकार की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई है। जिसका खुलासा मौका निरिक्षण रिर्पोट से उजागर हुआ है। इन सडकों को सुधारने के लिए अब मनरेगा के तहत कार्य करवाया जा रहा है। लेकिन लाखों रूपये की मनरेगा राशि खर्च करने के बावजूद भी इन सडकों को ठीक नहीं किया जा सका है। हालांकि संतराम ने सडक निर्माण की इस घोर अनियमितता के बारे में प्रदेश के मुखयमंत्री को भी लिखा था। लेकिन सरकार की ओर से कोई पहल न होती देखकर अब उन्होने अधिवक्ता देश राज के माध्यम से प्रदेश सरकार के लोनिवि सचिव, परिवहन सचिव और प्रबंध निदेशक को इन सडकों को ठीक करने और बनाने के लिए नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि इन सडकों को डीपीआर और मापदंडों के अनुसार बनाया और ठीक किया जाए। जिससे लोगों को कठिनाइयों का सामना न करना पडे। इसके अलावा यह भी मांग की गई है कि इस प्रकरण की जांच की जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही अमल में लाई जाए। उन्होने कहा कि अगर समय रहते इन सडकों को ठीक नहीं किया गया तो वह प्रदेश उच्च न्यायलय का दरवाजा खटखटाएंगे।

Friday, 17 October 2014

स्वयंसेवियों ने संवारा नलहोग गांव


मंडी। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बरयारा में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) का सात दिवसीय शिविर वीरवार को संपन्न हो गया। समापन समारोह की अध्यक्षता एसएमसी प्रधान सुंदर सिंह ने की। पाठशाला की प्रधानाचार्य सुमन गुप्ता ने बताया कि 10 अक्तुबर से 16 अक्तुबर तक चले इस शिविर में 42 बच्चों ने भाग लिया। शिविर के दौरान बच्चों ने श्रमदान से गोद लिए गांव नलहोग के प्राकृतिक जल स्त्रोतों व रास्तों की सफाई तथा मुरममत की। जबकि मंदिर के प्रांगण को भी चौड़ा किया गया। एनएसएस प्रभारी वाणिज्य प्रवक्ता जीत सिंह ने बताया कि शिविर के दौरान स्वयंसेवियों के बौधिक विकास के लिए उन्हे विभिन्न विषयों की जानकारी दी गई। शिविर में स्वयंसेवियों ने खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़ कर भाग लिया।

Thursday, 16 October 2014

चैक बाउंस मामले में दोषी को सजा


मंडी। चैक बाउंस के आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित होने पर अदालत ने उसे तीन माह के साधारण कारावास और 60 हजार रूपये हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया है। आरोपी को यह हर्जाना राशि शिकायतकर्ता के पक्ष में अदा करनी होगी। विशेष न्यायिक दंडाधिकारी रघुबीर सिंह के न्यायलय ने उप तहसील औट के बौंस (दयोरी) निवासी मोती राम पुत्र गंगा राम की शिकायत पर चलाए गए अभियोग के साबित होने पर भलांगी नागधार (दयोरी) निवासी ओम प्रकाश पुत्र दुर्गु राम को उक्त कारावास और हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया है। अधिवक्ता देवेन्द्र शर्मा के माध्यम से अदालत में निगोशिएबल इंस्ट्रुमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दायर शिकायत के मुताबिक आरोपी ओम प्रकाश ने उधार चुकाने के लिए 5 फरवरी 2013 को शिकायतकर्ता मोती राम के पक्ष में एक चैक जारी किया था। शिकायतकर्ता ने जब चैक को भुगतान के लिए बैंक में लगाया तो आरोपी के खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण यह बाउंस हो गया। जिस पर शिकायतकर्ता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आरोपी को 15 दिन का नोटिस जारी करके राशि का भुगतान करने को कहा था। लेकिन न तो नोटिस का जवाब दिया गया और न ही राशि का भुगतान किया गया। ऐसे में शिकायतकर्ता ने आरोपी के खिलाफ अदालत में शिकायत दायर करके अभियोग चलाया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ संदेह की छाया से दूर अभियोग साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी को उक्त कारावास और हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया है।

मंडी में बनाया जाए आधुनिक पुस्तकालयः शहीद भगत सिंह विचार मंच

मंडी। प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मंडी में आधुनिक और बेहतरीन पुस्तकालय के निर्माण की मांग की गई है। इस संदर्भ में शहर की संस्...