Monday, 9 June 2014

उपायुक्त का आभार जताया


मंडी। भगवान मुहल्ला चौक में सीवरेज लीकेज को ठीक कर देने पर स्थानिय वासियों ने आभार व्यक्त किया है। भगवान मुहल्ला निवासी धनदेव भारद्वाज, धर्म चंद, समीर कश्यप, जितेन्द्र, कुलदीप, तिलक राज, कृष्ण चंद, हेम राज और पंकज मोदगिल ने बताया कि सीवरेज टैंक लिकेज को ठीक कर दिया गया है। उन्होने बताया कि उपायुक्त महोदय को ज्ञापन देने और सभी समाचार पत्रों में इस समस्या के बारे में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित होने के बाद संबंधित विभाग हरकत में आया है। वीरवार को विभाग की ओर से भेजे गए अधिकारियों और कर्मचारियों ने टैंक से फैल रही गंदगी की समस्या को सुलझा लिया है। भगवान मुहल्ला निवासियों ने उपायुक्त मंडी देवेश कुमार, आईपीएच विभाग और मीडिया का इस समस्या को सुलझाने के लिए आभार व्यक्त किया है।

चौहट्टा में शनिवार को बहाल की जाए ट्रैफिक व्यवस्था


मंडी। भारतीय कमयुनिस्ट पार्टी की शहरी इकाई ने मंडी व्यापार मंडल की चौहट्टा में शनिवार को ट्रैफिक बहाल करने की मांग का समर्थन किया है। सीपीआई के महासचिव समीर कश्यप ने कहा कि पार्टी ने इस मांग को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप कर इस फैसले पर आपत्ती जताई थी। उन्होने कहा कि चौहट्टा में टैफिक बंद कर देने का खामियाजा चौहट्टा बाजार के साथ लगते मुहल्लों को भुगतना पड रहा है। उन्होने कहा कि ट्रैफिक बंद कर देने से दोपहिया वाहनों, रेहडियों और तिपहिया वाहनों की भीड इन मुहल्लों की प्राचीन समय में बनी तंग और संकरी गलियों में घुस आती है। जिससे इन रिहायशी इलाकों में लोगों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड रहा है। विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को इस टैफिक के कारण कई परेशानियां उठानी पड रही हैं। वाहनों की भारी तादात इन गलियों में आ जाने के कारण लोगों को हमेशा दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। वहीं पर इन मुहल्लों में स्थित दुकानों के व्यापारियों पर भी विपरीत प्रभाव पड रहा है। भाकपा ने मांग की है कि चौहट्टा के सौन्दर्यीकरण के नाम पर शहरवासियों के अमन चैन से खिलवाड न किया जाए और इस तुगलकी फरमान को तुरंत प्रभाव से वापिस लिया जाए। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन ने चौहट्टा को सुंदर बनाने की दलील देकर प्रत्येक शनिवार को सायं 6 बजे से 8 बजे तक ट्रैफिक बंद करने की अधिसूचना जारी की है।

भगवान मुहल्ला में सीवरेज चैंबर लीकेज से परेशानी


मंडी। भगवाहन मुहल्ला चौक में सीवरेज टैंक की गंदगी के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड रहा है। स्थानीय वासियों ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए उपायुक्त मंडी को ज्ञापन सौंपा है। भगवान मुहल्ला निवासी धनदेव भारद्वाज, धर्म चंद, समीर कश्यप, जितेन्द्र, कुलदीप, तिलक राज, कृष्ण चंद, हेम राज व अन्यों ने बताया कि आईपीएच विभाग के सीवरेज विंग की ओर से मुहल्ला में पानी की टंकी के नजदीक एक सीवरेज टैंक बनाया गया है। लेकिन यह टैंक आए दिन निकासी न होने के कारण गंदगी से भर जाता है। टैंक से निकलने वाली गंदगी सारी मुहल्ले में फैल जाती है। उन्होने बताया कि इस बारे में अनेकों बार विभाग और संबंधित ठेकेदार को उन्होने सूचित किया है। लेकिन इसे ठीक करने के बाद यह फिर से दूसरे या तीसरे दिन गंदगी से भर जाता है और इसमें शौच निकलनी शुरू हो जाती है। उन्होने बताया कि गंदगी सारे मुहल्ले में बिखर रही है। जिससे स्थानीय वासियों में अपने स्वास्थय को लेकर आशंका व्यापत है। उन्होने बताया कि इस टैंक से अगले टैंक के बीज में ज्यादा दूरी है। जिससे सीवरेज ठीक तरह से दूसरे टैंक तक नहीं पहुंच पाता। उन्होने मांग की है कि भगवाहन मुहल्ला चौक से आगे वाले टैंक के बीच में एक नये टैंक का निर्माण किया जाए। जिससे सीवरेज की निकासी ठीक ढंग से हो सके। उन्होने बताया कि डिभा बावडी के पास भी एक सीवरेज पाइप फट जाने के कारण गंदगी खुले में बिखर रही है। स्थानीय वासियों ने उपायुक्त मंडी से आग्रह किया है कि सीवरेज टैंक से लोगों को आए दिन हो रही परेशानी से निजात दिलाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं और भागवाहन मुहल्ला चौक के इस टैंक को जल्द से जल्द ठीक करने के निर्देश दिये जाएं।

मौलिक कर्तव्यों का पालन जरूरी


मंडी। ऐसा देखा गया है कि देश के नागरिक अपने अधिकारों के प्रति तो जागरूक हैं लेकिन अपने मौलिक कर्तव्यों के प्रति अनभिज्ञ रहते हैं। संविधान के अनुच्छेद 51-ए के ए भाग में पहले मौलिक कर्तव्य के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे। भारतीय संविधान की प्रस्तावना दी गई है कि हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढाने के लिए दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत दो हजार छह विक्रमी) को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं। पहले मौलिक कर्तव्य के अनुसार हमें संविधान के आदर्शों (उद्देशिका के उद्देश्य) का सम्मान करना चाहिए। यह बताता है कि संविधान जनता से निकलता है तथा जनता ही अंतिम सम्प्रभु है। उदेदेशिका लोगों के लक्ष्यों-आकांक्षाओं को प्रकट करती है। इसका प्रयोग किसी विध्यमान अस्पषटता को दूर करने में हो सकता है। यह जाना जा सकता है कि संविधान किस तारीख को बना और लागू हुआ था। उद्देशिका को संविधान का भाग माना जाए इसको लेकर दो मत हैं। परंपरागत मत के अनुसार उद्देशिका को संविधान का भाग नहीं मानता क्योंकि यदि इसे विलोपित भी कर दे तो भी संविधान अपनी विशेष स्थिति बनाये रख सकता है। इस मत के अनुसार इसे पुस्तक के पूर्व परिचय की तरह समझा जा सकता है। यह मत सर्वोच्च न्यायलय ने बेरूबारी यूनियन वाद में वर्ष 1960 में दिया था। जबकि नवीन मत इसे संविधान का एक भाग बताता है। केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य 1973 में दिये निर्णय में सर्वोच्च न्यायलय ने इसे संविधान का भाग बताया है। संविधान का एक भाग होने के कारण ही संसद ने इसे 42वें संविधान संशोधन से इसे संशोधित किया था और समाजवादी, पंथनिरपेक्ष शब्द जोड दिये थे। मौजूदा समय में नवीन मत ही मान्य है। उददेशिका मे वर्णित शब्दावली का विश्लेषण करने से इनके अर्थ पारिभाषित होते हैं। सम्प्रभु का अर्थ राज्य की सर्वोपरि राजनैतिक शक्ति है, राज्य की राजनैतिक सीमाओं के भीतर इसकी सत्ता सर्वोपरि है और यह किसी बाहरी शक्ति की प्रभुता स्वीकार नहीं करती है। समाजवादी से अभिप्राय है कि भारतीय गणतंत्र आवश्यक रूप से जनतांत्रिक होना चाहिए। समाजवादी लक्ष्यों की प्राप्ती जनतांत्रिक माध्यमों से होनी चाहिए। यह शब्द भारत को एक जनकल्याणकारी राज्य के रूप में स्थापित कर देता है। धर्मनिरपेक्षता का मतलब है लौकिकता को अध्यात्मिकता पर वरीयता देना। धर्म पर आधारित भेदों का सम्मान करना और अन्य धर्मों के प्रति राज्य द्वारा तटस्थता बरतना ही धर्म निरपेक्षता है। ऐसे राज्य किसी एक धर्म को प्रोत्साहन न देकर विभिन्न धर्मों के मध्य सहिष्णुता तथा सहयोग बढाने का कार्य करें। यह एक कर्तव्य है जिसके पालन से विभिन्न धर्मों के बीच सहअस्तित्व स्वीकार किया जाता है। इस प्रकार के राज्य विधि के समक्ष समता बरतते हैं तथा नागरिकों के मध्य धार्मिक आधार पर विभेद नहीं बरतते और उनको समान अवसर भी उपलब्ध करवाया जाता है। इस प्रकार के राज्य धर्मविरोधी, अधार्मिक न होकर धर्मनिरपेक्ष होते हैं। वे अपने नागरिकों को इच्छा के अनुसार धर्म पालना का अधिकार देते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 इससे संबंधित हैं। पंथनिरपेक्षता शब्द भारतीय साहित्य में सर्व धर्म समभाव के आदर्श के रूप में मौजूद था। यहां धर्म पर आधारित विभेद का विरोध किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 19 और 326 जनतंत्र से संबंधित है। भारत में बहुदलीय लोकतंत्र है। गणतंत्र का अर्थ यह है कि राज्य का प्रमुख निर्वाचित होगा न कि वंशानुगत। न्याय का अर्थ है सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय। एक व्यक्ति एक वोट राजनैतिक न्याय की प्राप्ति के लिए जरूरी है। सामाजिक न्याय की प्राप्ति अस्पृश्यता और उपाधि उन्मूलन से की जानी है। जबकि आर्थिक न्याय के लिए राज्य हेतु नीति निर्देशक तत्वों का प्रावधान रखा गया है। स्वतंत्रता का अर्थ नागरिक पर बाध्यकारी तथा बाहरी प्रतिबंधों का अभाव है। एक नागरिक द्वारा दूसरे के अधिकारों का उल्लंघन करना निषेधित है। नागरिक स्वतंत्रता अनुच्छेद 19 और धार्मिक स्वतंत्रता अनुच्छेद 25-28 में वर्णित है। अनुच्छेद 15 से 18 में समानता को वर्णित किया गया है। जिसका अर्थ है स्तर और अवसरों की समानता स्थापित करना। बधुंत्व का अर्थ है भारतीय नागरिकों के मध्य बंधुत्व की भावना स्थापित करना क्योंकि इसके बिना देश में एकता स्थापित नहीं की जा सकती है। संविधान के तीन प्रमुख विभाग हैं। भाग एक में संघ तथा उसका राज्य क्षेत्रों के विषय में टिप्पणी की गई है तथा यह बताया गया है कि राज्य क्या हैं और उनके अधिकार क्या हैं। दूसरे भाग में नागरिकता के विषय में बताया गया है कि भारतीय नागरिक कहलाने का अधिकार किन लोगों के पास है और किन लोगों के पास नहीं है। विदेश में रहने वाले कौन लोग भारतीय नागरिक के अधिकार प्राप्त कर सकते हैं और कौन नहीं कर सकते। तीसरे भाग में भारतीय संविधान द्वारा मौलिक अधिकारों के विषय में विस्तार से बताया गया है। मूल कर्तव्य मूल संविधान में नहीं थे इन्हे 42वें संविधान संशोधन में जोडा गया है। ये रूस से प्रेरित होकर जोडे गये तथा संविधान के भाग 4 (क) के अनुच्छेद 51-अ में रखे गए हैं। ये कुल 11 हैं। सबसे पहला कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें। दूसरा कर्तव्य है कि स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रिय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करे। तीसरा कर्तव्य भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसकी मर्यादा बनाए रखे। चौथा, देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे। पांचवा, भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरूद्ध हैं। छठा, हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करे। सातवां, प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं उनकी रक्षा करे और उसका संवर्धन करे तथा प्राणि मात्र के प्रति दयाभाव रखे। आठवां, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे। नवां, सार्वजनिक संपति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे। दसवां, व्यक्तिगत और सामुहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊंचाइयों को छू ले। ग्यारवां और अंतिम कर्तव्य शिक्षा के अधिकार से संबंधित है। इसके अनुसार यदि माता पिता या संरक्षक हैं तो वह छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले अपने, यथास्थिति, बालक या प्रतिपाल्य के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करे। भारत वर्ष का नागरिक होने के नाते हमें जहां मौलिक अधिकारों के प्रति जानकारी होनी चाहिए। वहीं हमें अपने मौलिक कर्तव्यों के प्रति भी सजग होना चाहिए। हम यह प्रण लें कि देश के प्रति अपने कर्तव्यों को लेकर हम देशवासियों को जागरूक करें। जिससे हमारा देश दिन दुगुनी रात चौगुनी उन्नति कर सकें।

चैक बाउंस की महिला आरोपी को छह माह कारावास एक लाख जुर्माने की सजा


मंडी। चैक बाउंस के मामले में महिला आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित होने पर अदालत ने छह माह के साधारण कारावास और 1,00,000 रूपये हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया है। विशेष न्यायिक दंडाधिकारी रघुबीर सिंह के न्यायलय ने जवाहर नगर निवासी बलजिंद्र सिंह पुत्र प्रीत पाल की शिकायत को उचित मानते हुए समखेतर बाजार निवासी किरण शर्मा पत्नी जोगिन्द्र शर्मा को उक्त कारावास और हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया। अधिवक्ता कैलाश बहल के माध्यम से अदालत में दायर शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता खेतान उत्पादों को विक्रय करने का व्यवसाय करते हैं। आरोपी ने उनसे जान पहचान होने के कारण 22 जुलाई 2011 को एक लाख 25 हजार रूपये की उधार ली। जिसे आरोपी ने अगले दिन वापिस लौटाने का आश्वासन दिया। लेकिन शिकायतकर्ता ने जब भी राशि की मांग की तो आरोपी ने बहानेबाजी करके उन्हे यह राशि नहीं लौटाई। शिकायतकर्ता के अनेकों बार मांग करने के बाद इस उधार को चुकाने के लिए आरोपी ने उन्हे पचास-2 हजार रूपये के दो चैक जारी किये। शिकायतकर्ता ने जब यह चैक भुगतान के लिए बैंक में लगाए तो आरोपी के खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण यह बाउंस हो गये। ऐसे में उन्होने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आरोपी को 15 दिनों में राशि अदा करने के लिए कानूनी नोटिस जारी किया था। लेकिन इसके बावजूद भी आरोपी के राशि अदा न करने पर शिकायतकर्ता ने अदालत में निगोशिएबल इंस्ट्रुमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत दायर करके अभियोग चलाया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ चैक बाउंस का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी महिला को उक्त कारावास और हर्जाने की सजा का फैसला सुनाया है।

स्कूली बच्चों को बताए मौलिक कर्तव्य


मंडी। जिला विधिक सेवा समिति ने मंगलवार को मौलिक कर्तव्यों की जानकारी देने के लिए डीएवी सेनेटरी पब्लिक स्कूल में कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में समिति की ओर से पैरा लीगल वालंटियर समीर कश्यप एडवोकेट ने दस जमा दो के छात्र व छात्राओं को मौलिक कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होने कहा कि यह देखने में आता है कि लोगों को अपने मौलिक अधिकारों की जानकारी तो होती है लेकिन वह मौलिक कर्तव्यों के प्रति अनभिज्ञ रहते हैं। उन्होने संविधान के अनुच्छेद 51-ए में शामिल मौलिक कर्तव्यों की जानकारी दी। उन्होने कहा कि इन प्रावधानों से संशोधन करके ग्यारवें कर्तव्य के रूप में शिक्षा के अधिकार को शामिल किया गया है। शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों को मुफत और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान शामिल किया गया है। उन्होने कहा कि मौलिक कर्तव्यों में भारत के प्रत्येक नागरिक का पहला कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करें और इसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें। राष्ट्रिय ध्वज तिरंगे के बारे में जानकारी देते हुए उन्होने कहा कि यह समान चौडाई की सबसे ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत और नीचे गहरे हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच एक नीले रंग के चक्र द्वारा सुशोभित है। तिरंगे की अभिकल्पना पिंगली वैंकैया ने की थी। इसे स्वतंत्रता दिवस के कुछ दिन पहले 22 जुलाई 1947 को आयोजित संविधान सभा की बैठक में अपनाया गया था। भारत के राष्ट्रिय गान जन गण मन के लेखक और संगीत की रचयिता प्रसिध कवि रविन्द्र नाथ टैगोर थे। इसे बजाने या गाने की अवधि 52 सेकेंड है। राष्ट्रिय गीत वन्दे मातरम की रचना बंकिम चन्द्र चटर्जी ने संस्कृत में की थी। यह स्वतंत्रता की लडाई में लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत था। इसका स्थान जन गण मन के बराबर ही है। इसे पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के सत्र में गाया गया था। उन्होने भविष्य के नागरिकों से आहवान किया कि वे देश के प्रति अपने कर्तव्यों को लेकर देशवासियों का जागरूक करें। जिससे हमारा देश दिन दुगुनी रात चौगुनी उन्नति कर सके।

Saturday, 7 June 2014

महासंघ ने सेवा विस्तार को ऐतिहासिक निर्णय बताया


मंडी। हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी बहुजन महासंघ ने प्रदेश सरकार द्वारा सेवा विस्तार 58 से 59 वर्ष करने के निर्णय को ऐतिहासिक करार दिया है। महासंघ ने इस दूरगामी निति के निर्णय के लिए प्रदेश के मुखयमंत्री वीरभद्र सिंह का आभार व्यक्त किया है। महासंघ के चेयरमैन अमर नाथ खुराना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बाबूराम यादव, महासचिव राम लाल सुमन, मुखय सलाहकार हेम सिंह चौहान और कार्यकारिणी सदस्यों ने संयुक्त ब्यान में केन्द्र सरकार की तर्ज पर प्रदेश सरकार को भी सेवा विस्तार 60 वर्ष तक करने की मांग की है। उन्होने कहा कि जेसीसी की बैठक आयोजित न होने से कर्मचारियों की लंबित मांगों पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। उन्होने कहा कि प्रदेश के करीब तीन लाख कर्मचारी वर्ग, मजदूर, दैनिक वेतन भोगी, पार्ट टाइम कर्मचारी सरकार की रीढ़ की हड्डी हैं। ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द जेसीसी की बैठक को बुलाकर कर्मचारियों की लंबित मामलों को सुलझाने में आगे आना चाहिए।

मंडी में बनाया जाए आधुनिक पुस्तकालयः शहीद भगत सिंह विचार मंच

मंडी। प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मंडी में आधुनिक और बेहतरीन पुस्तकालय के निर्माण की मांग की गई है। इस संदर्भ में शहर की संस्...