Wednesday, 30 April 2014

हिमाचली लोकसंस्कृति की समृद्ध संपदा लुप्त होने के कगार पर


 मंडी। प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले मंडी जनपद को विरासत में लोकसंस्कृति का संपदा का अदभुत खजाना मिला है। लेकिन अधिकांश सांस्कृतिक विधाएं संरक्षण और संवर्धन के अभाव में दम तोडती नजर आ रही हैं। रियासत कालीन मंडी जनपद में जहां दर्जनों लोक नाटय और लोकनृत्य की विधाएं फलती फूलती रही। लेकिन इसके बाद यह सांस्कृतिक विरासत लगातार हाशिये पर जा रही है। कुछ विधाएं तो लगभग लुप्तप्राय ही हो गई हैं। सबसे बडा संकट तो जनपद की मंडयाली बोली और टांकरी लिपी पर आ गया है। मंडयाली की लिपी टांकरी थी लेकिन इसे जानने वाले आज गिने चुने ही रह गये हैं। मंडयाली में ही इन लोक विधाओं का संप्रेषण होता था। अनुमान लगाया जा सकता है कि जब मंडयाली बोली ही लुप्तप्राय होने के कगार पर है तो इन लोकनृत्य विधाओं के फलने फूलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। मंडयाली के संरक्षण के लिए कोई कदम सरकार की ओर से नहीं उठाया जा रहा है। लेकिन बोली, भाषा और संस्कृति जनपद के लोगों में रची बसी है। यही कारण है कि अभी तक पुरी तरह से लुप्त नहीं हो पाई है। यह ठीक है कि रियासतकाल से भी लोकनृत्य और लोकनाटय की विधाओं को बहुत कम राज्याश्रय था लेकिन इसके बावजूद लोकमानस में अपनी जगह होने के कारण यह अपनी संपन्नता के साथ जीवित थी। यह भी सच है कि रियासतकालीन दौर के बाद बोली, भाषा और संस्कृति पर देश-विदेश के सांस्कृतिक प्रभावों से जनपदीय लोक संस्कृति की विशेषताएं संकट में आ गई हैं। ऐसे में इनके संरक्षण के प्रयास किये जाने चाहिए थे। लेकिन कोई सांस्कृतिक निति न होने के कारण लोकनाटयों व लोकनृत्यों की विधाएं गहरे संकट में हैं और कुछ के तो मात्र नाम ही सुनने को मिलते हैं। हिमाचल प्रदेश का केन्द्रीय जिला होने के कारण इसकी सीमाएं कुल्लू, कांगडा, बिलासपुर, हमीरपुर और शिमला जिलों के साथ सटी हैं। ऐसे में जनपद के लोगों का इन जिलों से संपर्क रहने के कारण इन क्षेत्रों का प्रभाव भी मंडी जनपद के लोकनाटयों और नृत्यों पर हमेशा से रहा है। मंडी जिला में करीब दो दर्जन लोकनाटय और नृत्यों की विधाएं प्रचलित थी। मंडी में लुड्डी, नागरीय नृत्य, गिद्धा, चरकटी, बुढडा, पहिया नृत्य, नाट नृत्य, जाग नृत्य, बाच नृत्य, हरिरंग नृत्य, छम्म नृत्य और लोकनाटय बांठडा की लोकविधाएं जनपद की संस्कृति की पहचान है।

लुड्डी

लुड्डी मंडी का प्रमुख लोकनृत्य है जो अभी भी लोगों के बीच अपनी पहचान बनाए हुए है। पुरूष, महिला, बच्चे, बुढे सभी इसमें भाग लेते हैं। लुडडी के दौरान नर्तकों को नृत्य की परंपरा का पालन करना होता है। धीरे-धीरे शुरू होने वाला यह नृत्य अपने चर्मोत्कर्ष पर बहुत तेज गति ले लेता है।

नागरीय नृत्य

यह नृत्य अब बहुत कम प्रचलन में रह गया है। इस नृत्य में मां श्यामाकाली की अराधना की जाती है। यह नृत्य ऋतु गीत के गायन किया जाता है।

बुढड़ा

लोकनाटय का प्रमुख पात्र बुढड़ा कहलाता है। उसके साथ दो पुरूष नारी वेश में होते हैं जिन्हे चंद्रावली कहा जाता है। नृत्य और अभिनय करते हुए बुढडा प्रांगण में प्रवेश करता है उसके बाद क्रमवार चंद्रावली, जोगी, डंडू, पहाडी आदी पात्र सम्मलित होते हैं। चानणी ओची री चागा, ग्वालू रा बांढडा लागा, लोकगीत इस लोकनाटय के दौरान गाया जाता है।

पहिया नृत्य

मंडी जनपद में कुछ विशेष अवसरों पर किये जाने वाले पहिया नृत्य भी परंपरा में रहा है। लेकिन यह लोकनृत्य भी अब लगभग गौण हो चुका है। इस नृत्य में महिलाएं सिर पर पारू (मिट्टी का बर्तन) उठाकर नृत्य करती हैं। इस पारू में छोटे-2 छेद कर दिये जाते हैं और पारू में दीपक जलाकर इसे सिर पर रखकर नृत्य किया जाता है। यह नृत्य अधिकांशत: मंदिरों के प्रांगण में कुंवारी कन्याओं द्वारा किया जाता है।

नाट नृत्य

जिला के सराज, सनोर, बदार व बल्ह क्षेत्र में नाट नृत्य आज भी जनपद की देव परंपरा का प्रमुख लोकनृत्य है। शिवरात्री के दौरान मंडी जनपद में आए देवताओं के बजंतरी और देवलू अपने वादय यंत्रों से शहर को गुंजायमान करके कदमों को नाट नृत्य में थिरकने पर मजबूर कर देते हैं। नाट नृत्य में महिला, पुरूष, जवान, बूढे सभी ढोल, नगाडों, शहनाई और करनाल की धुनों पर नृत्य करते हैं।

कलाधर्मी नहीं बन पाए लोककला के संवाहक बजंतरी

लेकिन इस परंपरा के संवाहक लोकवादक बजंतरियों को अभी तक कलाधर्मी होने का सम्मान नहीं मिल पाया है। संरक्षण के अभाव में बजंतरी अभी भी वंचित और उपेक्षित हैं जिससे उनका इस लोक परंपरा से जुडे रह पाना संकट में है। सरकार को चाहिए कि इस लोकधर्मी कला को संरक्षित करने के लिए गंभीर प्रयास किये जाएं। लोकनृत्यों का संरक्षण और संवर्धन किया जाए मंडी जिला की लुप्त प्राय मंडयाली बोली को संरक्षित किया जाए। जिससे लोकनृत्यों की पहचान बची रह सके। मंडी जनपद के लुप्तप्राय हो गए लोकनृत्यों पर शोध करवाई जाए और शोध से प्राप्त सामग्री को प्रचारित और प्रसारित किया जाए। जिससे अगली पीढी तक लोक संस्कृति का हस्तांतरण किया जा सके। स्थानीय लोककलाओं से संबंधित विषय स्कूलों में शुरू किया जाए।
 

क्या कहते हैं कला के जानकार

डा. विद्याचंद ठाकुर

हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा डा. तुलसी रमण के संपादन में प्रकाशित हिमाचल के लोक नाट्य पुस्तक में प्रकाशित मंडी के लोकनाटय लेख में डा. विद्याचंद ठाकुर का कहना है कि बहुत से जिलों के साथ सीमा सटी होने के कारण मंडी में लोकसंस्कृति और लोकनाटय की विविधता अन्य जिलों की अपेक्षा अधिक पाई जाती है। उनके अनुसार लोकनाटय बांठड़ा का एक विकसित रूप बुढड़ा कहलाता है।

दीनू कश्यप

इसी पुस्तक में प्रकाशित दीनू कश्यप के लेख मंडी का बांठड़ा में उनका कहना है कि इस नाटय में मनोरंजन के लिए हास परिहास होते हैं। पुराने समय में नैतिक मुल्यों का उल्लंघन करने वाले किसी धनी लम्पट की पोल खोलना, शिक्षा के लिए या फिर राजा या सता द्वारा किसी बेगुनाह को दंडित किए जाने के निर्णय की भर्त्सना करना या समाज को शिक्षा देने जैसे विषय होते थे, जिन्हे यह लोकधर्मी नाटयकार अपनी सामर्थ्य के चलते जनता में ले जाते थे।

रामदयाल नीरज

हिमाचल के वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी रामदयाल नीरज का मानना है कि लोकनाटयों के कलाकार बहुधा दलित या निम्न वर्ग के ही हुआ करते थे। इनमें संवाद स्वछंदता कलाकारों का अपना अधिकार क्षेत्र रहा है।

डा. प्रेम भारद्वाज

कहानीकार मुरारी शर्मा की पुस्तक बांठडा के प्राक्कथन में डा. प्रेम भारद्वाज का कहना है कि पौराणिक धार्मिक परंपरा से अलग बांठडा का एक पारंपरिक रूप यह भी रहा है जिसका कैनवास सीधा रोजमर्रा की जिंदगी से जुडा है। सर्वसाधारण की पीड़ा को उजागर करता है।

मुरारी शर्मा

बांठडा पुस्तक के लेखक मुरारी शर्मा के अनुसार मंडयाली संस्कृति को करीब से जानने के लिए लोकनाटय बांठडा से बेहतर और माध्यम नहीं है। बांठडा में तत्कालीन समाज की मनोविनोदी वृति के अलावा सामाजिक समरसता सांस्कृतिक विविधिता, भाषिय कौशल तो है ही, वहीं पर शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करने का जज्बा एवं अंधविश्वास पर प्रहार करने की हिम्मत भी रही है। यही इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण भी रहा है। 

Tuesday, 29 April 2014

खराब मशीनरी बेचने पर हर्जाना अदा करने के आदेश


मंडी। खराब मशीनरी बेचने को विक्रेता की सेवा में कमी करार देते हुए जिला उपभोक्ता फोरम कुल्लू ने उपभोक्ता के पक्ष में नयी मशीनरी 30 दिनों में देने का फैसला सुनाया है। ऐसा न करने पर विक्रेता को मशीनरी की कीमत 4,21,687 रूपये ब्याज सहित अदा करने होगी। इसके अलावा विक्रेता की सेवाओं में कमी के कारण उपभोक्ता को हुई परेशानी और यंत्रणा के बदले 40,000 रूपये हर्जाना और 4000 रूपये शिकायत व्यय भी अदा करने के आदेश दिये हैं। जिला उपभोक्ता फोरम कुल्लू के अध्यक्ष जे एन यादव और सदस्यों सत्याभामा व शिव सिंह ने भुंतर के पितांबर कंपलेक्स स्थित पिट शॉप कार केयर के मैसर्ज सोहेल काहोल पुत्र आर के काहोल की शिकायत को उचित मानते हुए उतर प्रदेश के नोइडा स्थित मैनमशीन (इंडिया) लिमिटेड को उपभोक्ता के पक्ष में नयी मशीनरी निश्चित अवधि में न देने पर इसकी कीमत 9 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करने का फैसला सुनाया है। अधिवक्ता गौरव सूद के माध्यम से फोरम में दायर शिकायत के अनुसार उपभोक्ता ने बेरोजगार होने के कारण जीविका कमाने के लिए विक्रेता से 4,21,687 रूपये की कीमत की मशीनरी और उपकरण खरीदे थे। इस मशीनरी की एक साल की वारंटी थी। विक्रेता के कर्मियों ने इस मशीनरी को कुल्लू में फिट किया था। उक्त कर्मियों ने उपभोक्ता को मशीन चलाने का प्रशिक्षण भी दिया था। लेकिन मशीन लगाने के एक माह में ही मशीन ने कार्य करना बंद कर दिया। उपभोक्ता के विक्रेता को संपर्क करने पर विक्रेता के कर्मियों ने मशीन की जांच में पाया था कि हॉट और कोल्ड हाई प्रेशर वाशर कार्य नहीं कर रहे हैं। ऐसे में कर्मियों ने मशीन की मुरम्मत करके उपभोक्ता को आश्वस्त किया था कि अब यह खराब नहीं होगी। लेकिन इसके बाद भी कई बार मशीनरी और उपकरणों में खराबी आई। जिससे उपभोक्ता को भारी परेशानी का सामना करना पडा। ऐसे में उपभोक्ता ने फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी। विक्रेता के फोरम की कार्यवाही में भाग न लेने पर एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि मशीनरी खरीदने के एक माह के भीतर ही इसमें खराबी आ गई। मशीनरी की सात बार रिपेयर करने और उपकरणों को बदलने के बावजूद भी इसकी खराबी को दूर नहीं किया जा सका। जिससे यही निष्कर्ष निकलता है कि उपभोक्ता को खराब मशीन विक्रय की गई है। खराब मशीनरी बेचने को विक्रेता की सेवाओं में कमी करार देते हुए जिला उपभोक्ता फोरम ने विक्रेता को उपभोक्ता के पक्ष में 30 दिनों के भीतर नयी मशीनरी निशुल्क देने के आदेश दिये। ऐसा न करने पर विक्रेता को मशीनरी की कीमत ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिये। जबकि विक्रेता की सेवाओं में कमी के कारण उपभोक्ता को हुई परेशानी के बदले हर्जाना और शिकायत व्यय भी अदा करने का फैसला सुनाया है।

मंडी संसदीय चुनाव क्षेत्र में महिलाओं की रहेगी अहम भूमिका


 मंडी। मंडी संसदीय क्षेत्र में 17 में से पांच विधानसभा क्षेत्रों के सामान्य मतदाताओं में महिला मतदाताओं की संख्या पुरूषों से ज्यादा है। हालांकि इस संसदीय क्षेत्र में कोई भी एनआरआई मतदाता नहीं है। चुनाव आयोग ने मंडी संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं की अंतिम सूचि जारी कर दी है। जिसके मुताबिक मंडी संसदीय क्षेत्र में इस बार कुल 11,50, 408 वोटर हैं। क्षेत्र के मंडी, सरकाघाट, बल्ह, जोगिन्द्रनगर और लाहौल-स्पिति में सामान्य मतदाताओं में महिला मतदाताओं की संख्या पुरूषों से अधिक है। इनमें मंडी में महिला मतदाता 33588 और पुरूष मतदाता 32732, सरकाघाट में 39214 और 38393, बल्ह में 33615 और 33338, जोगिन्द्रनगर में 43720 और 42666 और लाहौल-स्पिति में 11300 और 11281 हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि मंडी संसदीय क्षेत्र में एक भी ओवरसीस (एनआरआई) मतदाता नहीं है। हिमाचल प्रदेश के छह जिलों के 17 विधानसभा क्षेत्रों में फैले मंडी संसदीय क्षेत्र में कुल 1985 पोलिंग स्टेशन हैं। सबसे अधिक पोलिंग स्टेशन रामपुर (149), कुल्लू (140) और बंजार (134) में हैं। संसदीय क्षेत्र के जोगिन्द्रनगर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 87598 मतदाता हैं। जबकि इसके बाद बल्ह में 79755 और कुल्लू में 78436 मतदाता हैं। नौकरी के दौरान मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या 9919 है। इनमें सबसे अधिक मतदाता सरकाघाट (2148), मंडी (1232) और जोगिन्द्रनगर (1212) के हैं। इधर, 2-मंडी संसदीय चुनाव क्षेत्र के रिर्टनिंग आफीसर उपायुक्त मंडी देवेश कुमार ने मतदाताओं की अंतिम सूचि जारी करने की पुष्टि की है। उन्होने बताया कि नौकरी के दौरान मतदान करने वाले मतदाताओं को डाक के माध्यम से 24 अप्रैल को डाक मत जारी कर दिये गए हैं।

मंडी संसदीय क्षेत्र के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या

विधानसभा क्षेत्र - मतदाता

भरमौर - 67941
लाहौल-स्पिति - 23040
मनाली- 63696
कुल्लू - 78436
बंजार - 63826
आनी-  74637
करसोग- 63278
सुंदरनगर- 70582
नाचन -73206
सराज- 70120
द्रंग- 76153
जोगिन्द्रनगर -87598
मंडी- 67552
बल्ह - 67935
सरकाघाट -79755
रामपुर -68690
किन्नौर -53963
कुल -1150408  

Sunday, 27 April 2014

कोटली में लोकनाटक बांठडा ने धूम मचाई


मंडी। कोटली तहसील मुखयालय के वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला प्रांगण में मंडयाली लोकनाटक बांठडा ने अपनी धूम मचाई। जबकि शिमला के संकल्प नाटय दल की प्रस्तुति दी टाइपिस्ट की प्रस्तुति भी चिर स्मरणीय रही। प्रसिध नाटककार विलियम शेक्सपियर के जन्मदिवस के अवसर पर सोसायटी फार द एम्पावरमेंट आफ कल्चरल डिवेलपमेंट की ओर से कोटली में एक दिवसीय नाटय उत्सव का आयोजन किया गया। सोसायटी की ओर से कोटली में विगत एक माह से चलाई जा रही सांस्कृतिक कार्यशाला के समापन पर यह आयोजन किया गया। नाटय उत्सव में कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार किये गए नाटक सपनों का मायाजाल और मंडयाली लोक नाटक बांठडा की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। सोसायटी के अध्यक्ष वेद कुमार ने इन नाटकों का निर्देशन किया। इसके अलावा शिमला से आए नाटय दल संकल्प की प्रस्तुति दी टाइपिस्ट को भी लोगों की खूब सराहना मिली। इस नाटक का निर्देशन प्रदेश के प्रसिद्ध रंग निर्देशक केदार ठाकुर ने किया।  सोसायटी के अध्यक्ष वेद कुमार ने बताया कि कोटली में आयोजित कार्यशाला के दौरान 10 प्रशिक्षुओं को अभिनय की बारीकियां सिखाई गई। इसी दौरान सपनों का मायाजाल और लोकनाटक बांठडा की प्रस्तुतियों को तैयार करके नाटय उत्सव में प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला के दौरान कोटली तहसील मुखयालय में स्थानीय समस्याओं को उजागर करते हुए विगत 18 अप्रैल को नुक्कड नाटकों का प्रदर्शन भी किया गया। नाटय उत्सव में अभिनय कर रहे स्थानीय प्रशिक्षुओं सिमरन, जगजीत, गौरव, कृष्ण, अंजना, ज्योती, शगुन, रोहण, जितेन्द्र कश्यप, खेम चंद, बली भद्र ठाकुर, तनुप्रिया और सोहन के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।  नाटय उत्सव के मुखयअतिथी कला प्रेमी अरूण कुमार और कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में एसवीएम कोटली के प्रधानाचार्य भाग सिंह ठाकुर विशेष रूप से मौजूद थे। मुखय अतिथी अरूण कुमार ने कार्यशाला और नाटय उत्सव का आयोजन करने के लिए सोसायटी के प्रयास की सराहना की। उन्होने इसे नियमित रूप से आयोजित करते रहने की जरूरत पर बल दिया। इस मौके पर स्थानीय वासी नरेन्द्र, लता, सुनील कुमार, राहुल, मिलन सिंह, प्रशांत मोहन सहित सैंकडों स्थानीय दर्शकों ने नाटय प्रस्तुतियों का आनंद उठाया।

बंदी ने फरारी के लिए पुलिस कर्मी पर किया हमला


मंडी। न्यायलय परिसर में अदालत के समक्ष पेश करने के लिए लाए गए एक विचाराधीन बंदी ने पुलिसकर्मी पर हमला करके फरार होने की कोशीश की। उसे परिसर में ही काबू कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करके तहकीकात शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार उपजेल मंडी में विचाराधीन बंदी खूब राम को भगौडे अपराधी के मामले में मंगलवार को अदालत के समक्ष पेश करने के लिए न्यायलय परिसर में लाया गया था। उसके साथ तीन पुलिस कर्मी तैनात थे। जिनमें एक कर्मी न्यायलय कक्ष में चला गया। इसी दौरान उक्त आरोपी ने हथकडी से आरक्षी हरिश कुमार की गर्दन और हाथ पर हमला करके परिसर से भागने की कोशीश की। लेकिन आरोपी को न्यायलय परिसर में ही काबू कर लिया गया। आरक्षी हरिश कुमार की शिकायत पर सदर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पता चला है कि आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस और घर में अनाधिकृत प्रवेश के दो मामले में अदालतों में विचाराधीन हैं। लेकिन अदालत में हाजिर न होने के कारण उस पर भगौडे अपराधी का मामला भी दर्ज किया गया था। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से वह उपजेल मंडी में विचाराधीन बंदी है। जिला पुलिस अधीक्षक आर एस नेगी ने आरोपी के पुलिस कर्मी पर हमला करने और भागने की कोशीस करने की घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सदर थाना पुलिस ने इस संबंध में भादंस की धारा 353 और 332 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जिसकी जांच शहरी चौकी प्रभारी चेत सिंह भंगालिया कर रहे हैं। 

प्रिंसिपल को झूठे मामले में फंसाने का प्रकरण सुलझा


 मंडी। सराज विधानसभा क्षेत्र के गाडागुसैण स्कूल के प्रधानाचार्य को झूठे मामले में फंसाने के विरोध में क्षेत्र के सैंकडों लोगों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया। स्थानिय वासियों ने उपायुक्त मंडी के माध्यम से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को ज्ञापन प्रेषित करके इस मामले की प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की है। क्षेत्र के गाडागुसैण स्कूल के प्रधानाचार्य को एनडीपीएस के मामले में फंसाने को लेकर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को क्षेत्र के सैंकडों लोग जिला मुख्यालय में पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त कार्यालय परिसर में पुलिस की कार्यवाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जिसके बाद स्थानीय लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त मंडी और जिला पुलिस अधीक्षक के समक्ष इस मामले को जोर शोर से उठाया और उनके माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को एक ज्ञापन प्रेषित किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि सदर थाना पुलिस ने विगत 17 अप्रैल को वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गाडागुसैण के प्रधानाचार्य कमलेश गुप्ता को एक ­ाूठे मामले में गिरफ्तार किया है। उनका कहना है कि प्रधानाचार्य कमलेश गुप्ता का सेवा संबंधी रिकार्ड हमेशा से उत्कृष्ट रहा है। उन्होने पाठशाला के लिए कई प्रभावी और ठोस कदम उठाए हैं। इसी कारण कुछ असामाजिक लोगों को असुविधा हुई और उन्होने प्रधानाचार्य को रंजिश के तहत पुलिस अधिकारियों के साथ सांठ गांठ करके झूठे मुकदमे में फंसाया है। ऐसे में इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए। उन्होने कहा कि दूर दराज के क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों का मनोबल बनाए रखने के लिए इस मामले की कडी जांच की जानी चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले के अन्वेषण अधिकारी की भूमिका काफी संदेहास्पद है। जिसके चलते जांच के प्रभावित होने की संभावना है। उन्होने कहा कि मामले का अन्वेषण अधिकारी बदल कर जांच का कार्य वरिष्ठ अधिकारी को दिया जाए। इसके अलावा प्रधानाचार्य के खिलाफ षडयंत्र करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ जांच करके इस मामले के दोषियों को कडी सजा दी जाए। क्षेत्र की ग्राम पंचायत थाचाधार के पूर्व प्रधान मेघ सिंह, उप प्रधान मोहन लाल, बंजार पंचायत समिति के अध्यक्ष किशन ठाकुर, खौली पंचायत के पूर्व प्रधान राम सिंह, ग्राम पंचायत घाट के पूर्व उप प्रधान राजू, ग्राम पंचायत सराज के पूर्व प्रधान आलम चंद, उप प्रधान हीरा सिंह, विजयपाल सिंह, तेज सिंह, सूरजमणी, खेमसिंह, मान सिंह, सेवा सिंह, दुर्गा सिंह, लाभ सिंह, दौलत राम, भूपेन्द्र कुमार, खोर सिंह, वरयाम सिंह, कपूर सिंह, रमेश चंद, काहन सिंह, ठाकुर दास, भगतराम, बुधराम, तेज राम, राकेश राणा, हरीश राणा, राकेश कुमार, राजेश कुमार, मनजीत कुमार, किशोरी लाल, यशपाल, नरेन्द्र कुमार, वीर सिंह, प्रेम सिंह, उतम राम, मंगत राम, हेम सिंह ठाकुर, सुशील चौहान और धनी राम सहित सैंकडों लोगों ने प्रधानाचार्य के खिलाफ दर्ज मामले की प्राथमिकी निरस्त करने और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।
 

मंडी। ...आखिरकार सत्यमेव जयते की जीत हुई है। वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गाडागुसैण के प्रधानाचार्य जहां एनडीपीएस के मामले में निर्दोष साबित हो कर रिहा कर दिये गए हैं। वहीं पर इस मामले में पुलिस ने स्कूल के पुर्व डीपीई परमानंद को हिरासत में ले लिया है। जिसे अदालत ने पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। गाडागुसैण के प्रधानाचार्य को एनडीपीएस के झूठे मामले में फंसाने का प्रकरण अब सुल­झा लिया गया है। पुलिस ने इस मामले की तहकीकात में यु टर्न लेते हुए जहां गाडागुसैण पाठशाला के प्रधानाचार्य पुरानी मंडी निवासी कमलेश कुमार गुप्ता पुत्र परमानंद गुप्ता को बरी कर दिया है। पुलिस ने प्रधानाचार्य के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 169 के तहत पर्याप्त सबूत और आधार न होने के कारण उन्हे निजी मुचलके पर रिहा कर दिया है। पुलिस ने इस संबंध में एक रिर्पोट जिला एवं सत्र न्यायधीश एस सी कैंथला की विशेष अदालत में विचाराधीन जमानत याचिका के जवाब में प्रस्तुत की है। जिसके चलते अदालत ने जमानत याचिका को निष्प्रभावी करने के आदेश दिये हैं। जबकि पुलिस की ओर से न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर एक विवेक खेनाल की अदालत में गाडागुसैणी निवासी डोला राम के ब्यान दर्ज किये हैं। इधर, सदर थाना पुलिस ने इस मामले में हिरासत में लिए गई शारिरिक शिक्षा प्राध्यापक जिला कुल्लू के बुरूआ (मनाली) निवासी परमानंद पुत्र उतम को अदालत के समक्ष पेश किया गया। जहां पुलिस ने आरोपी से फोन की बरामदगी, चरस के स्त्रोत और प्रधानाचार्य की गाडी खोलने में प्रयोग किये गए सामान की बरामदगी और तहकीकात शेष होने के कारण उसे पुलिस रिमांड में भेजने की अर्जी दी गई। जिसे स्वीकारते हुए न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर एक विवेक खेनाल के न्यायलय ने आरोपी को 29 अप्रैल तक पांच दिन की पुलिस रिमांड में भेजने के आदेश दिये हैं।

कैसे घटित हुआ घटनाक्रम

17 अप्रैल को सदर थाना पुलिस का दल विद्रांवणी के लिए गश्त पर तैनात था। इसी बीच पुलिस को मुखबर से सूचना मिली कि एक कार में चरस आ रही है। पुलिस ने स्वतंत्र गवाहों को शामिल करके विंद्रावणी चैक पोस्ट पर नाकाबंदी की। पुलिस ने कुल्लू की ओर से आ रही प्रधानाचार्य की कार को रोक कर इसकी तलाशी ली तो कार की डिक्की में एक कपडे के बैग में से 500 ग्राम चरस बरामद हुई। पुलिस ने प्रधानाचार्य कमलेश को हिरासत में लेकर उसे अगले दिन 18 अप्रैल को अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपी को चार दिन के पुलिस रिमांड में भेज दिया। रिमांड के दौरान पुलिस को दरयाफ्त के दौरान प्रधानाचार्य ने बताया कि 2013 में जनता की मांग को देखते हुए उनका तबादला थलौट से गाडागुसैणी के लिए हुआ। वह काफी अनुसाशित और सिद्धांतवादी हैं और उनकी निष्पक्ष और सटीक कार्यप्रणाली के कारण स्कूल के स्टाफ के कुछ सदस्य और असामाजिक तत्व उनके खिलाफ साजिश करने लगे। इससे पहले 16 दिसंबर 2013 को कुछ लोगों ने स्कूल के एक कमरे का ताला और दरवाजा तोडकर ताजी कटी हुई लकडी के स्लीपर रखकर ­झूठे केस में फंसाने की कोशीश की थी। जिस पर पुलिस ने इस संबंध में बालीचौकी पुलिस की कार्यवाही के दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। प्रधानाचार्य ने पुलिस को बताया कि जिस वाहन से चरस बरामद हुई उसे वह अपने क्वाटर से बाहर सडक पर खडा करते हैं। एक बार पहले भी कुछ लोगों ने इसे डेढ किमी दूर खडा कर दिया था। उन्होने डीपीई सहित कुछ लोगों पर झूठे मामले में फंसाने का शक जाहिर किया था। उन्हे 21 अप्रैल को अदालत ने 25 अप्रैल तक पुलिस रिमांड में भेज दिया था।

कैसे हुआ मामले का पटाक्षेप

पुलिस ने शह जाहिर किये गए लोगों की कॉल डिटेल हासिल की। जिसमें घटना वाले दिन डीपीई परमानंद को लोकेशन गाडागुसैण में पाई गई। डिटेल में उसकी डोलाराम के साथ बातचीत होना पाया गया। सदर थाना पुलिस को मुखबरी करने वाले कर्मी ने अपनी दरयाफ्त में बताया कि गाडी में चरस होने की सूचना उन्हे डोलाराम ने दी थी। जिसके बाद अन्वेषण अधिकारी ने स्थानीय लोगों, स्टाफ के सदस्यों और चरस की सूचना देने वाले डोले राम के ब्यान दर्ज किये। विगत 24 अप्रैल को पुलिस ने डीपीई परमानंद को मादक एवं नशीले पदार्थ अधिनियम की धारा 20 और 58 तथा •ाादंस की धारा 506 के तहत हिरासत में लिया।

क्या हकीकत सामने आई

परमानंद ने स्कूल में प्रधानाचार्य न होने के कारण कार्यवाहक प्रधानाचार्य का कार्य किया। अगस्त 2013 में जब कमलेश ने प्रधानाचार्य का पद संभाला तो उन्होने कुछ कार्यों में अनियमितता पाई। परमानंद के गैरहाजिर रहने के बावजूद भी उपस्थिती रजिस्टर में दर्ज करने पर कमलेश ने उच्चाधिकारियों को इसकी शिकायत की थी। जिसके कारण परमानंद का तबादला जिला शिमला के कांगला स्कूल को कर दिया गया था। जिसके कारण वह कमलेश से रंजिश रखता था। कैसे दिया घटना को अंजाम 16 अप्रैल को परमानंद गाडागुसैणी पहुंचा। रात के समय चरस का थैला कमलेश की गाडी में रख दिया। इसके बाद 17 अप्रैल को इसकी सूचना थाना को देने के लिए उसने डोला राम को कहा और खुद बस पर बैठ कर चला गया। कमलेश की कार से जब चरस बरामद हुई तो उन्हे इसका कुछ भी ज्ञान नहीं था। यह चरस परमानंद ने कमलेश को झूठे केस में फंसाने के लिए रखी थी।

स्थानिय लोगों और संगठनों ने किया था आंदोलन

प्रधानाचार्य कमलेश को ­झूठे मामले में फंसाने की सूचना मिलते ही स्थानीय पंचायतों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था। स्थानीय लोगों ने जिला मुख्यालय पहुंच कर प्रधानाचार्य को निर्दोष करार देने की मांग की थी। अध्यापक संघ और महाजन सभा की ओर से भी विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला लगातार जारी रहा।  

डोर टू डोर गारबेज कुलैक्शन के लिए नप ने कमर कसी


 मंडी। छोटी काशी मंडी को सुंदर, स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए नगर परिषद ने अब कमर कस ली है। नगर परिषद ने डोर टू डोर गारबेज कुलेक्शन तथा अन्य समस्याओं के लिए वार्ड कमेटियों का गठन शुरू कर दिया है। इसी सिलसिले में कार्यकारी अधिकारी अजय पराशर ने वार्ड नंबर 9 लोअर भगवान मुहल्ला और वार्ड नंबर 12 रामनगर में बैठकों का आयोजन किया। मंडी। बैठकों को संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि मंडी नगर में जितना कुडा उत्पन होता है उसका कुछ ही हिस्सा नगर परिषद उठा पाती है। जबकि बाकि बचा हुआ कुडा नालियों या नदियों के किनारे फैंक दिया जाता है। शहर का सारा कुडा एकत्र करने के लिए अब डोर टू डोर गारबेज कुलैक्शन की जाएगी। जिसके लिए सभी वार्डों में संबंधित पार्षदों की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जा रहा है। जिनकी निगरानी में डोर टू डोर गारबेज कुलैक्शन की जाएगी। उन्होने कहा कि रामनगर जनसंख्या के लिहाज से मंडी का सबसे बडा वार्ड है। वार्ड में इस काम को अमली जामा पहनाने के लिए अनुबंध पर रखे गए कर्मी घरों से प्रतिदिन कुडा एकत्र करने का कार्य करेंगे। जिसके लिए प्रत्येक घर से इन कर्मियों को 30 रूपये प्रति महीने के देने होंगे। उन्होने कहा कि मंडी शहर के सभी घरों तक इस योजना को पहुंचाने के गंभीर प्रयास किये जा रहे हैं। अजय पराशर ने कहा कि नदियों के किनारों, नालियों और सडक पर पडे कुडे को साफ करने के बाद जगह-2 रखे गए डंपरों को हटा दिया जाएगा। जिसके बाद स्थानीय वासियों के पास एक ही विकल्प रहेगा कि वह डोर टू डोर गारबेज कुलैक्शन से जुडे। योजना शुरू हो जाने पर इधर-उधर कुडा फैंकने पर चालान किये जाएंगे। उसी तरह दुकानों पर भी नगर परिषद के कर्मी शाम के समय वहां जा कर कुडा एकत्र करेंगे। उन्होने कहा कि घरों से एकत्र होने वाला कुडा रिसाइकल होकर नगरपरिषद की आय का साधन बनेगा। उन्होने कहा कि रामनगर वार्ड में ज्यादा आबादी समृधशाली लोगों की है। ऐसा देखने में आया है कि समृद्ध लोग ही ज्यादा कुडा पैदा करते हैं। जिसके कारण इस वार्ड में सवच्छता एक बडी चुनौती है। यह वार्ड सुकेती नदी के किनारे स्थित है जिसके कारण लोग खुले में शौच करते हैं। स्थानीय वासियों ने मांग की है कि खुले शौच को रोकने के लिए शौचालय का निर्माण किया जाए। बैठक की अध्यक्षता विश्वकर्मा मंदिर समिति के अध्यक्ष ज्ञान शर्मा ने की। इस अवसर पर स्थानीय वासियों ने वार्ड की समस्याओं को लेकर चर्चा की। बैठक में वार्ड की साफ सफाई तथा अन्य समस्याओं की निगरानी के लिए वार्ड कमेटी का गठन किया गया। वार्ड कमेटी का अध्यक्ष पार्षद सिमरनजीत कौर को बनाया गया। इसके अलावा मनोनीत पार्षद सुखनिधान सिंह सुक्खा, योगराज योगा, कुलदीप सिंह, अतर सिंह, राजीव शर्मा, बेदी व अन्य स्थानीय वासियों को वार्ड कमेटी के सदस्य बनाया गया।
इधर,  इसी सिलसिले में कार्यकारी अधिकारी अजय पराशर ने वार्ड नंबर 9 लोअर भगवान मुहल्ला में बैठक का आयोजन किया। उन्होने कहा कि लोअर भगवान वार्ड में इस काम को अमली जामा पहनाने के लिए अनुबंध पर सात कर्मी घरों से प्रतिदिन कुडा एकत्र करने का कार्य करेंगे।  उन्होने कहा कि मंडी शहर के 8000 घरों में से अभी तक 2000 घरों से ही कुडा एकत्र किया जा रहा है। बैठक की अध्यक्षता सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष ओम चंद कपूर ने की। इस अवसर पर स्थानीय वासियों ने वार्ड की समस्याओं को लेकर चर्चा की। बैठक में वार्ड की साफ सफाई तथा अन्य समस्याओं की निगरानी के लिए वार्ड कमेटी का गठन किया गया। वार्ड कमेटी का अध्यक्ष पार्षद अलकनंदा हांडा को बनाया गया। इसके अलावा दमयंती कपूर, अन्नू मेहरा, नीलम कौशल, विमला, रत्न लाल वैद्या, राकेश कपूर, हंस राज वैद्या, ओम चंद कपूर, समीर कश्यप, प्रदीप परमार, विकास चंद्रा, तिलक राज, योगेश मोदगिल आदि वार्ड कमेटी के सदस्य बनाए गए।

पिक्चर- कमल सैनी एडवोकेट

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मंडी। प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मंडी में आधुनिक और बेहतरीन पुस्तकालय के निर्माण की मांग की गई है। इस संदर्भ में शहर की संस्...