Saturday, 18 March 2017

छेड़खानी के दोषी की अपील निरस्त, सजा बरकरार





मंडी। छेडखानी के आरोपी की अपील निरस्त करते हुए अदालत ने उसकी सजा बरकरार रखने का फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायधीश सी एल कोछड के न्यायलय ने सदर तहसील के भडयाल (टिक्कर) निवासी आरोपी मनीष कुमार की अपील को निरस्त करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनायी गई सजा के फैसले को बहाल रखा है। आरोपी को मुखय न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायलय ने 14 मार्च 2014 को सुनाए फैसले में भादंस की धारा 354 और 341 के तहत क्रमश: एक साल और एक माह के साधारण कारावास तथा एक हजार व पांच सौ रूपये जुर्माने की सजा सुनायी थी। आरोपी ने सत्र न्यायलय में अपील दायर करके इस फैसले को चुनौती दी थी। सत्र न्यायलय ने अपील की पैरवी के दौरान दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद इसका फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों से आरोपी पर छेडखानी और रास्ता रोकने का अभियोग साबित हुआ है। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला न्यायवादी बी एन शांडिल्य ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष के अनुसार 19 मई 2011 को शिकायतकर्ता स्कूल से घर जा रही थी। इसी दौरान आरोपी ने उसे रास्ते में रोक दिया और उसके साथ छेडखानी की। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करके अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोग साबित होने पर उसे उक्त सजा का फैसला सुनाया गया था। अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को उचित मानते हुए इसे चुनौती देने वाली आरोपी की अपील को निरस्त कर दिया और उसे उक्त कारावास भुगतने के लिए अदालत के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिये हैं।
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Friday, 17 March 2017

ट्रिब्यूनल ने दिए अधीक्षक पदोन्नत करने के निर्देश, मैकेनिक से रिकवरी के आदेश निरस्त





मंडी। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने वन विभाग के सेवानिवृत अधीक्षक की पदोन्नति के लिए दायर याचिका को स्वीकार करते हुए विभाग को इस बारे में विचार करने के निर्देश दिये हैं। इसके अलावा एक अन्य याचिका के फैसले में परिवहन निगम के सेवानिवृत मेकैनिक से रिकवरी करने के आदेशों को निरस्त कर दिया है। प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष वी के शर्मा और सदस्य प्रेम कुमार की बेंच ने मंडी सर्किट के दौरान हुई सुनवाई में वन विभाग से सेवानिवृत हुए नवरंग राम ठाकुर की याचिका को स्वीकारते हुए वन विभाग को उन्हें अधीक्षक ग्रेड-एक के पद पर उनके कनिष्ठों के उपर पदोन्नति देने हेतु विचार करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा ट्रिब्यूनल ने याचिककर्ता को पदोन्नति पर बढने वाली पेंशन तथा अन्य सभी सेवासंबंधी लाभ भी देने के आदेश दिये हैं। ट्रिब्यूनल ने याचिककर्ता का मामला नब्बे के दशक का होने के कारण विभाग को इसे 6 माह में निपटाने के आदेश दिये हैं। ऐसा न करने पर विभाग को 6 प्रतिशत ब्याज सहित बकाया राशि का भुगतान करना होगा। इधर, एक अन्य याचिका के फैसले में ट्रिब्यूनल ने हिमाचल पथ परिवहन निगम से सेवानिवृत मेकैनिक इंदर देव की याचिका को स्वीकारते हुए विभाग के वसूली आदेशों को निरस्त कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि विभाग की ओर से जारी आदेशों के तहत उक्त मैकेनिक से की जा रही वसूली कानून के तहत अनुमती प्राप्त नहीं है। ऐसे में ट्रिब्यूनल ने वसूली आदेशों को निरस्त करने का फैसला सुनाया है। इसके अलावा ट्रिब्यूनल ने निगम को याचिकाकर्ता की रोकी गई ग्रेच्युटी राशि भी अदा करने के आदेश दिये हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से ट्रिब्यूनल में इन मामलों की पैरवी अधिवक्ता एस पी चटर्जी ने की।
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Sunday, 12 March 2017

होली के दिन जननायक बन जाते हैं राजमाधव राय





अभी-2 लोकवाद्यों की ध्वनि नज़दीक आते जान पड़ा कि माधो राव फाग बरध्वाने के लिए हमारे भगवान मुहल्ला में पहुंचने ही वाले हैं। मुहल्लावासी पहले ही उनके स्वागत में एकत्र हैं। गिट्ठा जल रहा है और फाग (कांभल का पेड) अलग से रखा गया है। राजमाधव राय के मुहल्ला में प्रवेश करते ही सभी ने उन्हें गुलाल लगाया। माधो राय के फाग की परिक्रमा के दौरान इसका दहन किया गया। इसके बाद माधो राय अगले मुहल्ले की ओर फाग बरध्वाने और मंडी वासियों से घर द्वार जाकर होली खेलने के लिए रवाना हो गए। ये परंपरा बहुत पुरानी है और बचपन से होली की इस विशिष्टता को देखता आया हुं। पर मुझे आज के दिन के माधो राय सचमुच के जननायक नजर आते हैं जो होली खेलने लोगों के बीच जाते हैं। जबकि जो आजकल राज संभाले हैं वह अपने घरों में ही अपने चहेतों को बुलाकर होली का जश्न मना लेते हैं। अगर वह भी लोगों के बीच ऐसे तीज त्योहारों पर पहुंचे तो वह भी जननायक बन सकते हैं।
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Friday, 10 March 2017

बस स्टैंड में एचआरटीसी कर्मियों को दी कानूनी जानकारी




मंडी। यहां के पड्डल स्थित अंतरराज्यीय बस स्टैंड में वीरवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता मुखय न्यायिक दंडाधिकारी राजेश चौहान ने की। इस अवसर पर उन्होने हिमाचल पथ परिवहन निगम के कर्मियों को विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होने बताया कि प्राधिकरण की ओर से जरूरतमंद लोगों को मुफत कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता अनुसूचित जाति व जनजाति के सदस्यों, सभी महिलाओं, मानसिक रूप से अक्षम, आपदा प्रभावितों, फैक्टरी मजदूरों और एक लाख रूपये तक की वार्षिक आमदनी वाले लोगों को दी जाती है। जिसके तहत सरकारी खर्च पर वकील मुहैया करवाना, न्याय शुल्क तथा मुकदमे से संबंधित अन्य खर्च दिया जाता है। निशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए सादे कागज पर आवेदन करना होता है। इस अवसर पर अधिवक्ता समीर कश्यप ने सूचना का अधिकार, मिडिएशन और ग्रामीण विधिक संरक्षण एवं सहायता केन्द्रों के बारे में जानकारी दी। जबकि अधिवक्ता ललित ठाकुर ने मोटर वाहन अधिनियम, उपभोक्ता कानून तथा अन्य कानूनी प्रावधानों के बारे में बताया। शिविर में मंडी बस स्टैंड के अड्डा इंचार्ज मुखय निरिक्षक जितेन्द्र पाल, सहायक निरिक्षक कृष्ण चंद, उप निरिक्षक तारा चंद सहित निगम के चालक-परिचालक व स्टाफ तथा जिला विधिक प्राधिकरण के कर्मी मौजूद थे।
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जिला उपभोक्ता फोरम का साल 2008 का रिकॉर्ड होगा समाप्त





मंडी। जिला उपभोक्ता फोरम मंडी, कुल्लू और लाहौल-स्पिती का साल 2008 का रिकार्ड एक माह में समाप्त कर दिया जाएगा। इस बारे में इन जिलों के उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष पुरेन्द्र वैद्य ने आदेश जारी किया है। उन्होने अपने आदेश में कहा है कि इन जिला उपभोक्ता फोरमों का 1 जनवरी 2008 से 31 दिसंबर 2008 तक का रिकार्ड एक माह में समाप्त कर दिया जाएगा। इस रिकार्ड में उक्त अवधी में निस्तारित की गई शिकायतें, इजराय याजिकाएं तथा अन्य अर्जियां शामिल हैं। उन्होने जनसाधारण को सूचित किया है कि वर्ष 2008 के आदेश तथा अन्य दस्तावेज निर्धारित फीस के साथ फोरम के पास आवेदन करके एक माह में प्राप्त किये जा सकते हैं।
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Friday, 3 March 2017

शिवरात्रि महोत्सव में 60 देवी-देवताओं से हुआ भेदभाव




मंडी। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2017 में भी करीब 60 अपंजीकृत देवताओं का पंजीकरण नहीं हो पाया है और उनके साथ भेदभाव इस वर्ष भी जारी है। यह देवता इस साल भी मेला कमेटी की ओर से मिलने वाली तमाम सुविधाओं से वंचित हैं। इस भेदभाव को लेकर वीरवार को जिला परिषद सद्सय संत राम की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी विवेक चंदेल के माध्यम से मेला कमेटी के अध्यक्ष उपायुक्त मंडी संदीप कदम को ज्ञापन सौंपा है। संत राम ने बताया कि शिवरात्रि महोत्सव में जिला के विभिन्न क्षेत्रों से करीब 60 ऐसे देवी-देवता भी पधारे हैं जिनको पंजीकृत न होने के कारण मेटा कमेटी की ओर से कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। इन देवताओं के साथ हजारों देवलु, बजंतरी व कारदार, गुर इत्यादि शामिल हैं। इन देवताओं में कुछ ऐसे भी देवता हैं जो करीब 30-35 सालों से निरंतर हर साल शिवरात्रि मेले में आ रहे हैं और मेला कमेटी के पास पंजीकृत करने के लिए आग्रह करते हैं। इस संदर्भ में अनेकों देवताओं ने कई बार मेला कमेटी से लेकर प्रदेश सरकार को ज्ञापन भी दिये हैं। लेकिन हर साल इन देवी देवताओं का पंजीकरण नहीं किया जाता है और उन्हें अपने स्तर पर मंडी में रहने ठहरने व खाने की व्यवस्था करनी पडती है। उन्होने कहा कि राज माधव राय व इस देव समागम के प्रति उनकी श्रद्धा के कारण वह सभी मुश्किलों का सामना करते हुए अनेकों सालों से मंडी आ रहे हैं। अति दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले इन देवी देवताओं को कमेटी की ओर से न ही मानदेय दिया जाता है और न ही अन्य कोई सुविधा। इनमें से अधिकतम देवता दलितों के हैं लेकिन दलितों के देवता होने के कारण ही इनके साथ भेदभाव करके इन्हे पंजीकृत न करने की साजिश हर साल रची जाती है। इन सभी अपंजीकृत देवी देवताओं को पंजीकृत करके यह भेदभाव खत्म किया जाए और उन्हें भी अन्य देवी देवताओं के समान मानदेय व अन्य सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं। उन्होने कहा कि इन देवताओं को पंजीकृत करने के लिए विगत 20 फरवरी को भी अतिरिक्त उपायुक्त हरिकेश मीणा के माध्यम से मुखयमंत्री वीरभद्र सिंह को ज्ञापन प्रेषित किया था। लेकिन मेला कमेटी इन तथ्यों के बारे में पूरी तरह से असंवेदनशील रही और इन देवताओं के पंजीकरण करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। उन्होने मेला कमेटी से आग्रह किया है कि इन देवी देवताओं को पंजीकृत करने में तत्परता दिखाई जाए अन्यथा देवलुओं को संघर्ष का रूख अपनाना पडेगा। उन्होने बताया कि इस बारे में जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया तो शुक्रवार को इन देवी देवताओं के देवलु काली पट्टी पहन कर मौन विरोध प्रदर्शन करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में एडवोकेट समीर कश्यप, हेत राम, टिकम राम, लालू राम चौहान, भोले राम, रेत राम, घांथु राम, टिकम चंद, बलदेव, कर्म सिंह, राजू, लेख राज, प्रेमी देवी, राम सिंह, ध्यान सिंह, रूकमणी देवी, कमला देवी, केहर सिंह, रविन्द्र कुमार, दीपू, नैना देवी, पिंकी, रोशन लाल, टेक चंद शर्मा, कौशल्या देवी, सुरेश कुमार, घनश्याम, मस्त राम, लेखराज, सन्नू, परमानंद और सीता देवी सहित अन्य देवलू शामिल थे।

प्रशासन ने मांगे मानने का दिया आश्वासन
इधर, एडीएम मंडी ने देर शाम को संत राम की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात उपायुक्त एवं अध्यक्ष मेला कमेटी संदीप कदम से करवाई। जिसमें उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि शिवरात्रि के तुरंत बाद देवताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा। उन्होने कहा कि अगली साल से इन देवी देवताओं के देवलुओं को इस स्थिति से नहीं गुजरना पडेगा।

अब नहीं देवी देवताओं का विरोध प्रदर्शन
मेला कमेटी से प्रतिनिधिमंडल की वार्ता पर संतोष जाहिर करते हुए संत राम ने कहा कि अब शुक्रवार को काली पट्टी पहन कर मौन विरोध प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। लेकिन अगर भविष्य में मेला कमेटी इन देवी देवताओं के पंजीकरण के लिए कदम नहीं उठाए तो संघर्ष को तेज किया जाएगा।
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बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने किया भावविभोर



मंडी। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान बुधवार को स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सभी का मन मोह लिया। डीएवी (आर्यसमाज) पाठशाला के नरसरी और केजी कक्षा के बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुति दी। नन्हें बच्चों ने हिमाचली लोकगीत प्यारी इंदरा गाने पर जमकर ठुमके लगाकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
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मंडी में बनाया जाए आधुनिक पुस्तकालयः शहीद भगत सिंह विचार मंच

मंडी। प्रदेश की सांस्कृतिक और बौद्धिक राजधानी मंडी में आधुनिक और बेहतरीन पुस्तकालय के निर्माण की मांग की गई है। इस संदर्भ में शहर की संस्...